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जिला अस्पताल में इलाज के लिए तड़पता रहा मासूम, नहीं पहुंचे डॉक्टर, नागपुर किया रेफर

जिला अस्पताल में इलाज के लिए तड़पता रहा मासूम, नहीं पहुंचे डॉक्टर, नागपुर किया रेफर


डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा। जिला अस्पताल में शनिवार दोपहर एक बार फिर विवाद की स्थिति निर्मित हुई। इस बार इलाज के लिए तड़पते बच्चे के परिजन व परिचितों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा मचाया। गंभीर रुप से घायल बच्चे को इलाज देने इमरजेंसी डॉक्टर को कॉल पर बुलाया गया था लेकिन एक घंटे तक डॉक्टर नहीं आए। जिससे आक्रोशित परिजनों ने ट्रामा यूनिट में जमकर हंगामा मचाया। हंगामें की सूचना मिलने पर अस्पताल चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश के बाद मामला शांत हुआ।
खापाभाट निवासी अजय मंडराह ने बताया कि खापाभाट में निगम द्वारा बिछाई जा रही पाइप लाइन के पाइप रखे है। शनिवार दोपहर मोहल्ले के बच्चे यहां खेल रहे थे। इस दौरान एक पाइप फिसलकर आठ वर्षीय वाशु पिता जितेन्द्र सोनेकर पर आ गिरा। पाइप में दबने से वाशू गंभीर रुप से घायल हो गया था। वाशू के कान और मुंह से खून बह रहा था। जिसे इलाज के लिए  जिला अस्पताल लाया गया। यहां एक घंटे तक इमरजेंसी डॉक्टर नहीं आए। इस दौरान बच्चा दर्द से तड़पता रहा। हंगामें के काफी देर बाद आए डॉक्टर ने हालत गंभीर होने पर उसे नागपुर रेफर कर दिया।
पाइप हटाकर बचाई जान-
पाइप के नीचे दबे वाशु की चीख सुनकर आसपास के लोगों ने पाइप हटाकर उसे बाहर निकाला। पाइप के नीचे दबने से वाशु के सिर पर गंभीर चोट और नाक की हड्डी भी टूट गई है। आनन-फानन में लोगों ने बच्चे को जिला अस्पताल लाया।
सीटी स्केन के लिए आधा घंटे का इंतजार-
अजय मंडराह ने बताया कि वाशू को जब सीटी स्केन के लिए ले जाया गया तो वहां भी आधा घंटे परेशान होना पड़ा। गरीबी रेखा का कार्ड होने के बाद भी 933 रुपए देना पड़ा। तब कहीं सीटी स्केन की रिपोर्ट दी गई।
पहले भी चिकित्सक व स्टाफ से हो चुकी मारपीट-
शनिवार को हुए विवाद के दो दिन पहले भी ट्रामा यूनिट और गायनिक वार्ड में मरीज के परिजनों ने हंगामा मचाते हुए चिकित्सक से विवाद किया था। ट्रामा यूनिट में चिकित्सक और स्टाफ के साथ मारपीट की गई थी। विवाद में एम्बुलेंस चालक को गंभीर चोटें आई थी। इसी तरह एक मरीज के परिजनों ने गायनिक मेें महिला चिकित्सक से विवाद करते हुए मारपीट की थी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।