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  • Instead of matching the bride and grooms horoscope for marriage, blood tests should be done: Amrita Fadnavis

दैनिक भास्कर हिंदी: कुंडली मिलाने के बजाय रक्त जांच कराएं:अमृता फडणवीस

June 18th, 2018

डिजिटल डेस्क,नागपुर। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने रोग संक्रमण की रोकथाम की उपाय योजना सुझाते हुए कहा है कि विवाह के लिए वर-वधू की कुंडली मिलाने के बजाय रक्त जांच करवाना चाहिए। श्रीमती फडणवीस ने कहा कि रोगियों को आत्मविश्वास कायम रखना चाहिए। बाल रोगियों को सामान्य बालकों की तरह स्नेह देने की आवश्यकता है। जरीपटका स्थित थैलेसीमिया व सिकलसेल उपचार सेंटर में पालकों व रोगग्रस्त बालकों के मिलन कार्यक्रम में श्रीमती फडणवीस बोल रही थी।

उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया व सिकलसेल अनुवांशिक रोग है, उन पर नियंत्रण पाया जा सकता है। थैलेसीमिया व सिकलसेल सेंटर के संचालन के लिए डॉ. विंकी रुघवानी के कार्यों की उन्होंने सराहना भी की। थैलेसीमिया व सिकलसेल ग्रस्त बच्चों को शैक्षणिक वर्ष में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया। आशीष हेडाऊ, कुमार भुरे व अलीशा अत्तारी नामक विद्यार्थियों ने विचार व्यक्त किए। साथ ही कार्यक्रम में नृत्य व गायन भी पेश किया गया। सेंटर के संचालक डॉ. विंकी रुघवानी ने बताया कि 10 जनवरी 2016 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सेंटर की शुरुआत की थी। सेंटर में रोगियों का नि:शुल्क उपचार किया जाता है।

विदर्भ में थैलेसीमिया व सिकलसेल ग्रस्त का प्रमाण अधिक है। मरीजों को 15 दिन से 1 माह में रक्त दिया जाता है। मनपा स्थायी समिति के सभापति वीरेंद्र कुकरेजा, प्रताप मोटवानी, डॉ. संगीता रुघवानी, हरीश बाखरू, डॉ. ईश्वर केसवानी, राकेश कृपलानी, नरेंद्र सतीजा, डॉ. राजीव चावला, डॉ. संजय कृपलानी, मरीज व उनके पालक उपस्थित थे। संचालन प्रीति केवलरामानी व सोनल ठक्कर ने किया। आभार रामलखन देशमुख ने माना।

माना जाता है कि सिकलसेल व थैलेसीमिया दोनों ही अनुवांशिक रोग है। सिकलसेल आमतौर पर बाल्यावस्था में उत्पन्न होता है और प्रायः ऐसे लोगों को होता है ( जिनके वंशज) इससे पीड़ित होते हैं। थैलेसीमिया भी अनुवांशिक रक्त रोग हैं। इस रोग के कारण रक्त / हीमोग्लोबिन निर्माण के कार्य में गड़बड़ी होने के कारण रोगी व्यक्ति को बार-बार रक्त चढ़ाना पड़ता हैं। भारत में हर वर्ष 7 से 10 हजार बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित पैदा होते हैं। यह रोग न केवल रोगी के लिए कष्टदायक होता है, बल्कि सम्पूर्ण परिवार के लिए कष्टों का सिलसिला लिए रहता हैं।