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मेलघाट कुपोषण मौत मामले में हाईकोर्ट तल्ख, कहा - जिस इलाके का सीएम, वहां बच्चों का यूं मरना शर्मनाक

मेलघाट कुपोषण मौत मामले में हाईकोर्ट तल्ख, कहा - जिस इलाके का सीएम, वहां बच्चों का यूं मरना शर्मनाक

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मेलघाट महाराष्ट्र राज्य के ऐसे क्षेत्र में है जिस इलाके का व्यक्ति पांच वर्षों से राज्य का मुख्यमंत्री है। इसके बावजूद इस इलाके में कुपोषण से बच्चों की मौत रही है। यह बेहद शर्मनाक है। बांबे हाईकोर्ट ने मंगलवार को कुपोषण से बच्चों की मौत के मुद्दे को लेकर दायर कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह तल्ख टिप्पणी की। इससे पहले जब कोर्ट को बताया गया कि मेलघाट में कुपोषण से मौत की दर घट रही है तो इस पर अदालत ने कहा कि क्या यह सरकार के लिए आनंद की बात है? महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के लिए कुपोषण से बच्चों की मौत शोभा नहीं देता है। यदि राज्य में एक भी बच्चे की मौत कुपोषण से हो रही है तो यह चिंता का विषय है। सरकार कुपोषण से मौत को रोकने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है औैर ढेरे योजनाएं बना रही है तो उनका असर क्यों नहीं दिख रहा है? 

कहां जाता है योजनाओं का पैसा 

हाईकोर्ट ने पूछा आखिर योजनाओं के पैसे कहां गायब हो रहे हैं? कही ऐसा तो नहीं राजीव योजना का नाम बदलकर कोई और नाम दिया जा रहा है और योजना के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है?  सरकार इस विषय पर व्यापक दृष्टिकोण अपनाए। 

डॉक्टर अभय बंग के कार्यों की की सराहना

आदिवासी इलाके खास तौर से गड़चिरोली में डॉक्टर अभय बंग के कार्यों की सराहना करते हुए न्यायमूर्ति एसी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति रियाज छागला की खंडपीठ ने कहा कि सरकार कह रही है कि आदिवासी इलाकों में डाक्टर काम करने के लिए नहीं जाते हैं तो आखिर डाक्टर बंग जैसे लोग कैसे वहां पर काम करते हैं और कैसे उनकी दवाएं लोगों तक पहुंचती हैं। कैसे वे दुर्गम इलाकों में लोगों तक पहुंच कर इलाज करते हैं। इस दौरान खंडपीठ ने कुष्ठरोगियों को लेकर बाबा आमटे व उनसे जुड़े हुए लोगों की ओर से किए जा रहे कार्यों का उदाहरण भी दिया। 

मुंबई के आसपास भी कुपोषण से क्यों हो रही मौत

आदिवासी इलाकों में काम पर न जानेवाले कितने डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है इसका अब तक क्यों ब्यौरा अदालत के सामने पेश नहीं किया गया है। मेलघाट दूर है लेकिन पालघर जैसे इलाके जो मुंबई से कुछ घंटों की दूरी पर है वहां पर भी बच्चों की कुपोषण से मौत हो रही है। गर्भवति महिलाओं को पोषक अाहार नहीं उपलब्ध हो रहा है।  वरिष्ठ अधिवक्ता जुगल किशोर गिलडा ने डाक्टर अभय बंग की ओर से गड़चिरोली में किए गए कार्यों की जानकारी दी और कहा कि सरकार ने उनके द्वारा दी गई रिपोर्ट पर भी पूरी तरह से अमल नहीं किया है। सरकार ने अब तक धारणी व चिखलदरा में आधुनिक अस्पताल का निर्माण नहीं किया है। जबकि इस इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं को विकसित करने के संबंध में 1996 में आदेश दिया गया था। हांलांकि इस दौरान अतिरिक्त सरकारी वकील नेहा भिडे ने खंडपीठ को बताया कि सरकार ने मेलघाट में डाक्टरों को तैनात किया है। इसके साथ ही इलाके की स्थिति को सुधारने के लिए मिशन मेलघाट योजना की शुरुआत की गई है। इस मामले के लिए कोर कमेटी भी गठित की गई गई है। जहां तक बात विशेषज्ञ डाक्टरों की है तो अमरावती इलाके में ऐसे डाक्टर जाने के लिए तैयार नहीं हैं। 

केंद्र सरकार को लगाई फटकार

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने इस मामले में हलफनामा न दायर करने के लिए केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। खंडपीठ ने कहा कि हम इस प्रकरण में सरकार के विभागों के बीच आरोप- प्रत्यारोप की बात को नहीं सुनना चाहते है। आखिर इस विषय को देखने वाले अधिकारी कोर्ट में क्यों नहीं हैं? लोकसभा चुनाव को समाप्त हुए 6 माह का समय बीत चुका है। अब सरकारी अधिकारी कहां व्यस्त हैं। 

इस राज्य में फिलहाल कोई सरकार नहीं 

इस बीच हाईकोर्ट ने चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर फंसे पेच को लेकर भी तंज कसा और कहा कि फिलहाल हम ऐसे राज्य में रह रहे हैं जहां कोई सरकार नहीं है। हाईकोर्ट ने अब मामले की अगली सुनवाई 5 दिंसबर को रखी है और अगली सुनवाई के दौरान मेलघाट इलाके के जिला स्वास्थ्य व बाल कल्याण अधिकारी को अदालत में तलब किया है और सरकार को मेलघाट के लिए लागू की गई योजनाओं का ब्यौरा देते हुए पूरे मसले पर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। 
 

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