बड़ा खतरा बनता जा रहा पैंक्रियाटिक कैंसर: टाइप-2 डायबिटीज में छिपे हो सकते हैं इसके शुरुआती लक्षण, धूम्रपान से रिस्क दोगुना

February 10th, 2022

डिजिटल डेस्क, नागपुर। (द न्यूयार्क टाइम्स) पैंक्रियाटिक कैंसर चिकित्सा जगत के लिए जल्द निदान अाैर उपचार के प्रयासाें की कामयाबी में बाधक बना हुआ है। एपल के संस्थापक स्टीव जाॅब्स की माैत का कारण भी यही कैंसर था। हालांकि यह दुर्लभ कैंसर है, लेकिन अमेरिका में जिस तरह इसके मामले बढ़ रहे हैं, 2040 तक कैंसर से हाेने वाली माैताें के लिए जिम्मेदार दूसरा सबसे प्रमुख कैंसर यही हाेगा। इस समय अमेरिका में कैंसर के कुल मामलों में 3% केस पैंक्रियाटिक कैंसर के अाते हैं। कैंसर से हाेने वाली माैताें में 7% इसी कैंसर से हाेती है। वैज्ञानिकाें की रिसर्च अब पैंक्रियाटिक कैंसर और टाइप-2 डायबिटीज के बीच संबंध पर केंद्रित हाे रही है। दरअसल, डायबिटीज भी पैंक्रियाज में ही हाेता है, जाे ब्लड शुगर स्तर काे नियंत्रित करने वाला हार्माेन इंसुलिन पैदा करता है। कुछ रिसर्च में कहा गया है कि टाइप-2 डायबिटीज पैंक्रियाटिक कैंसर का शुरुआती संकेत हाे सकता है। न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी अाॅफ अाॅकलैंड ने टाइप-2 डायबिटीज या पैंक्रियाटाइटिस या दाेनाें से पीड़ित 1.40 लाख लाेगाें काे 18 साल ट्रैक किया। पता चला कि पैंक्रियाटिक अटैक के बाद जिन्हें डायबिटीज हुई, उनमें टाइप-2 डायबिटीज वाले अन्य लाेगाें के मुकाबले पैंक्रियाटिक कैंसर का खतरा 7 गुना अधिक था।

10 में से एक मरीज 5 साल जी पाता है

पैंक्रियाटिक कैंसर कितना घातक है इसका पता इसी बात से चल जाता है कि इसकी चपेट में आए 10 में से एक ही मरीज 5 साल जीवित रह पाता है। इसका इलाज भी किस्मत से ही हो पाता है, क्योंकि जब किसी दूसरे मकसद से पेट का स्कैन या सर्जरी हो और इस कैंसर का पता लग जाए, तो ट्यूमर काे सर्जरी से हटाया जा सकता है। बाेस्टन के गैस्ट्राेइंटेस्टाइनल कैंसर सेंटर के मुताबिक यह एेसा कैंसर है जिसके लक्षण जल्द पकड़ में नहीं आते हैं। वजन घटना, थकान अाैर पेट में परेशानी जैसे लक्षण ज्यादातर दूसरे कारणाें से हाेने की आशंका रहती है। धूम्रपान से भी पैंक्रियाटिक कैंसर का खतरा दाेगुना हाे जाता है। एक-चाैथाई मामलाें में तो इस बीमारी के लिए जिम्मेदार मुख्य कारक ही धूम्रपान है। माेटापा, वयस्क हाेने पर वजन बढ़ना, कमर के अासपास अधिक चर्बी से भी बीमारी का जाेखिम बढ़ जाता है। क्रॉनिक पैंक्रिएटाइटिस, धूम्रपान अाैर ज्यादा शराब पीने के कारण पैंक्रियाज में अक्सर जलन हाेना तथा ड्राय क्लीनिंग अाैर मेटल वर्क जैसे उद्याेगाें में इस्तेमाल कुछ खास केमिकल के संपर्क में अाने वाले लाेगाें में इसका जाेखिम बढ़ जाता है। बढ़ती उम्र के साथ भी जाेखिम बढ़ता है। दाे-तिहाई केस 65 और उससे अधिक उम्र में सामने अाते हैं। परिवार में स्तन या अाेवरी कैंसर सहित अन्य बीमारियाें के इतिहास की भूमिका भी इसके पीछे हाे सकती है।

अमेरिका की नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट ने 2018 में स्टडी शुरू की है। 50 से 85 साल की उम्र के 10,000 लाेगाें का पंजीकरण किया, जिन्हें डायबिटीज हुई या ब्लड शुगर बढ़ी रहती है। इनमें पैंक्रियाटिक कैंसर का केस मिला ताे रिसर्चर्स पहले के सैंपलाें के अाधार पर शुरुअाती लक्षणाें काे पहचानने की काेशिश करेंगे। वहीं, पैंक्रियाटिक कैंसर एक्शन नेटवर्क इस कैंसर की जल्द पहचान के लिए शुरुअाती डायबिटीज वाले 12,000 लाेगाें का पंजीकरण करेगा। उम्र, वजन, ब्लड शुगर स्तर के अाधार पर ब्लड टेस्ट होगा। हालांकि इसके नतीजे 2030 तक आएंगे।