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यूनिवर्सिटी व कॉलेज कैंटीन में धड़ल्ले से बिक रहा है जंक-फूड, स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़

यूनिवर्सिटी व कॉलेज कैंटीन में धड़ल्ले से बिक रहा है जंक-फूड, स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  यूनिवर्सिटी के तमाम प्रयासों के बावजूद अपनी खुद की और संलग्नित कॉलेजों की कैंटीन में बिकने वाले जंक-फूड पर लगाम नहीं लगा पाया है। विश्वविद्यालय द्वारा अपने स्तर पर गठित समिति और कॉलेज स्तर पर बनए गए क्लस्टर का काम भी ठंडे बस्ते में है।  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने यूनिवर्सिटी कैंपस और कॉलेजों की कैंटीन में जंक-फूड बिक्री को प्रतिबंधित कर रखा है। कैंटीन में जंक फूड बिक्री की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की है। लेकिन नागपुर यूनिवर्सिटी न तो यूजीसी के आदेश और न ही विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर है। विद्यार्थियों की स्पष्ट मांग है कि यूनिवर्सिटी और कॉलेज कैंटीन में जंग-फूड बिक्री बैन हो, क्योंकि उनके ही कई साथी जानकारी के अभाव में या विकल्प के आभाव में कैंटीन में जंग फूड का सेवन करते हैं।  ऐसे करीब 150 विद्यार्थियों की शिकायत यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी कल्याण विभाग को मिली है।

कार्रवाई जोर पकड़ेगी
यूनिवर्सिटी और कॉलेज कैंटीन में जंक-फूड बिक्री की रोकथाम के लिए विवि प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। समय समय पर कार्रवाई होती है। विद्यार्थियों की शिकायतों को देखते हुए हम जंक-फूड को लेकर सक्रियता बढ़ाएंगे। यूजीसी की गाइडलाइन को पूरी तरह अमल किया जाएगा। -डॉ. अभय मुद्गल, विद्यार्थी कल्याण विभाग संचालक

इसलिए किया बैन 
विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर असर कॉलेज कैंटीनों में जंक-फूड बड़ी मात्रा मंे बिकता है। पिज्जा, बर्गर और अन्य खाद्य पदार्थों को स्वास्थ्य के लिहाज से हानिकारक मान कर विद्यापीठ अनुदान आयोग ने इसका संज्ञान लिया है। आयोग का दावा है कि चिकित्सकों की रिपोर्ट के अनुसार इन पदार्थों से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। विद्यार्थियों में वजन बढ़ने, अवसाद जैसी समस्याएं हो रही हैं। रिपोर्ट में कुछ उपाय सुझाए गए हैं, िजसमें जंक-फूड बिक्री पर पाबंदी भी शामिल है।

यूनिवर्सिटी ने ऐसे की खानापूर्ति
कॉलेजों कैंटीन में जंक-फूड की बिक्री पर प्रतिबंध के आदेश यूजीसी से प्राप्त होने के बाद विवि ने इस दिशा में कार्य प्रारंभ किया था। निरीक्षण करने के लिए विवि ने कॉलेजों को आपसी तालमेल से क्लस्टर समितियां स्थापित करने के आदेश दिए थे। हर कॉलेज को अपने नजदीकी 6 से 8 कॉलेजों के साथ मिल कर क्लस्टर बनाने को कहा गया था। इसमें कॉलेजों के विद्यार्थी व कल्याण अधिकारियों का समावेश था। क्लस्टर कॉलेजों की कैंटीन में जंक-फूड बिक रहा है या नहीं, इसकी निगरानी करेगा। लेकिन अब कॉलेज कैंटिन का निरीक्षण तो दूर विवि प्रशासन स्वयं कैंपस में जंक-फूड बिक्री रोकने में नाकाम है।

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