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राऊत बोले - मंदिर शुरू करने के फैसले पर भाजपा को श्रेय नहीं लेना चाहिए, जानिए - क्या है सरकार की गाइडलाइन

राऊत बोले - मंदिर शुरू करने के फैसले पर भाजपा को श्रेय नहीं लेना चाहिए, जानिए - क्या है सरकार की गाइडलाइन

डिजिटल डेस्क, मुंबई। शिवसेना सांसद संजय राऊत ने कहा कि राज्य में मंदिर समेत सभी धार्मिक स्थलों को खोलने के राज्य सरकार के फैसले पर भाजपा को श्रेय नहीं लेना चाहिए। रविवार को पत्रकारों से बातचीत में राऊत ने कहा कि कोई कितना भी श्रेय लेने की कोशिश करे लेकिन यह श्रेयवाद की लड़ाई नहीं थी। राऊत ने मंदिर खोलने के फैसले को हिंदुत्व की जीत बताने वाली भाजपा पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों को शुरू करने के फैसला किसी की जीत अथवा हार नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर ही देश भर में प्रार्थना स्थल बंद थे। यदि भाजपा के नेता यह बात भूल गए होंगे तो प्रधानमंत्री को एक पाठशाला अथवा चिंतन बैठक बुलाकर जीत और हार क्या होती है इसके बारे में पार्टी के नेताओं को बताना पड़ेगा। राऊत ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने धार्मिक स्थलों को खोलने के बारे में आदेश जारी किया है। मंदिर में मास्क लगाकर जाना चाहिए। मंदिरों में जाने के लिए भीड़ नहीं करनी चाहिए। राऊत ने कहा कि पिछले आठ महीने से मंदिर बंद थे लेकिन भगवान का आशीर्वाद महाराष्ट्र पर था। इसलिए राज्य पर कोरोना को मात देने में सफलत मिली है अभी कोरोना पर पूरी तरह से कामयाबी नहीं मिली है। हमें ध्यान रखना पड़ेगा। नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। 

मंदिर खोलने का फैसला भक्तों की श्रद्धा की जीत- पाटील 
   
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा कि राज्य सरकार का सोमवार से मंदिर शुरू करने की अनुमति देने का फैसला भक्तों की श्रद्धा की जीत है। रविवार को पाटील ने कहा कि भक्तों को भगवान से दूर रखने के सरकार के प्रयास पर आखिर श्रद्धा ने मात की और सरकार को मंदिर खोलने की अनुमति देने की सद्बुद्धि प्राप्त हुई। हम सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं। पाटील ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पुनःश्च हरिओम की घोषणा के साथ अनलॉक की प्रक्रिया  के तहत कई गतिविधियों को शुरू करने की अनुमति दी। लेकिन राज्य में मंदिर और प्रार्थना स्थलों को खोलने की अनुमति नहीं दी गई। इस कारण भाजपा की अध्यात्मिक समन्वय आघाड़ी ने आंदोलन किया। भक्तों के इस आंदोलन को भाजपा ने सक्रिय समर्थन दिया। आखिरकार सरकार को धार्मिक स्थलों को शुरू करने की अनुमति देने के लिए फैसला लेना पड़ा। पाटील ने कहा कि कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या कम हो रही है लेकिन महामारी का खतरा टला नहीं है। कोरोना की दूसरी लहर की संभावना जताई जा रही है। इसलिए  भक्तों को मंदिरों में दर्शन करने के लिए कोरोना के नियमों का पालन करना चाहिए। 

सिद्धिविनायक मंदिर में करेंगे दर्शन- कदम 

राज्य में प्रार्थना स्थलों के शुरू होने के मौके पर सोमवार को भाजपा की ओर से आनंदोत्सव मनाया जाएगा। भाजपा विधायक व प्रवक्ता राम कदम सुबह 11 बजे ढोल-बाजे के साथ दादर स्थित सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन के लिए जाएंगे। कदम ने कहा कि जनता के दबाव के कारण सरकार की करारी हार हुई है। इसलिए जनता की जीत का जश्न मनाया जाएगा। वहीं मंदिर शुरू करने के लिए राज्य भर में आंदोलन करने वाले भाजपा आध्यात्मिक समन्वय आघाड़ी के प्रदेश अध्यक्ष आचार्य तुषार भोसले शिर्डी के साईंबाबा मंदिर में दर्शन के लिए जाएंगे।  
 

जानिए - क्या है सरकार की गाइडलाइन

महाराष्ट्र सरकार ने कल यानी सोमवार से धार्मिक स्थल खोलने का फैसला लिया है। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने 16 नवंबर से शर्तों के साथ सभी मंदिर खोले जाने की इजाजत दे दी है। इससे पहले जान लीजिए प्रार्थना स्थल शुरु करने से जुड़े निर्देश।

प्रार्थना स्थलों में आने वाले लोगों का मास्क पहनना अनिवाोर्य होगा और समय समय पर हाथ धोना आवश्यक होगा। सामाजिक दूरी (6 फुट) का पालन जरूरी होगा। हाथों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखना होगा। खासते व छीकते समय मुह पर कपड़ा रखना अनिवार्य होगा।

65 साल के उपर के लोग यदि उन्हें कोई बीमारी है तो वे घर पर रहे। इसी तरह गर्भवती महिलाओं व 10 साल से कम उम्र के बच्चे मंदिर न जाने की सलाह दी गई है

मंदिर में प्रवेश व निकास की अलग व्यवस्था की जाए। बिना मास्क के प्रार्थना स्थलों में किसी को प्रवेश न दिया जाए। मंदिर के प्रवेशद्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था हो।

प्रार्थना स्थलों मे आनेवाले लोगों को मूर्तियों व पवित्र किताबों को छूने की इजाजत नहीं होगी। 

प्रार्थना स्थलों में रिकार्डेड भक्ति गीत बजाने की इजाजत होगी। समूह में भजन गाने से बचना होगा। 

प्रार्थना स्थल में एक चटाई के इस्तेमाल से बचने के लिए कहा गया है। लोगों को अपनी चटाई लाने के निर्देश दिए गए है। 

कोरोना से बचने के उपायों से जुड़े पोस्टर मंदिर परिसर के महत्वपूर्ण स्थान पर लगाना होगा। इन उपायों को लेकर जागरूकता फैलाने वाले वीडियों ग्राफ संदेश भी दिखाने होगे। 

भीड़ नियंत्रण को लेकर प्रार्थना स्थल में प्रभावी इंतजाम करना होगा। मंदिर प्रबंधन स्थानीय निकाय के साथ मिलकर भीड़ नियंत्रण की दिशा में पहल करनी होगी। इसके तहत एक बार में कितने लोग मंदिर में जाएंगे। यह तय करना होगा। 

मंदिर परिसर में प्रसाद बाटने व प्रार्थना स्थल में पवित्र जल के छिड़काव पर रोक होगी। अन्नदान  की प्रक्रिया के दौरान समाजिक दूरी का पालन जरूरी होगा

जूता -चप्पल को भक्तों को अपने वाहनों में रखना होगा। मंदिर परिसर के दुकानों,होटल व कैफीटेरिया में सामाजिक दूरी का पालन अनिवार्य होगा। 

मंदिर परिसर में पड़े मास्क को नष्ट करने की प्रभावी व्यवस्था बनानी होगी। फर्श की नियमित अंतराल पर सफाई करना होगा। मंदिर परिसर में कार्यरत कर्मचारियों को कोरोना से जुड़े सुरक्षा उपायों व प्रोटोकॉल का का पालन करना जरुरी होगा। यदि कोई व्यक्ति बीमार पाया जाता है तो उसकी जानकारी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को देनी होगी। 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।