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रिश्वत लेने वाले  श्रम निरीक्षक और लिपिक को चार साल की कैद

रिश्वत लेने वाले  श्रम निरीक्षक और लिपिक को चार साल की कैद

डिजिटल डेस्क,छिंदवाड़ा। एक आवेदक की फर्म का रजिस्ट्रेशन करने के लिए पंद्रह सौ रूपये की रिश्वत लेने वाले श्रम निरीक्षक एवं उसके सहायक को चार साल की कैद से दंडित किया गया है। इस संबंध में बताया गया है कि फर्म का रजिस्ट्रेशन कराने के एवज में श्रम निरीक्षक ने 15 सौ रुपए की रिश्वत मांगी थी। श्रम निरीक्षक द्वारा मांगी गई रिश्वत की राशि लिपिक वसूल रहा था। लोकायुक्त की टीम ने छापामार कार्रवाई करते हुए लिपिक को रंगे हाथों पकड़ा था।

टीम ने श्रम निरीक्षक और लिपिक के खिलाफ अपराध दर्ज कर प्रकरण न्यायालय में पेश किया था। इस मामले में सुनवाई करते हुए विशेष सत्र न्यायाधीश ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए भ्रष्टाचार अधिनियम की अन्य धाराओं व धारा 120 बी में चार-चार साल की सजा व पांच-पांच हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
 

जिला अभियोजन अधिकारी समीर पाठक ने बताया कि 23 मई 2014 को अधिवक्ता आनंद काटोलर ने गुलाबरा सक्सेना कॉलोनी निवासी हरिशंकर पांडे की ओर से लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक को शिकायत की थी कि हरिशंकर पांडे एक फर्म का रजिस्ट्रेशन कराना चाहते है। उनके द्वारा पूरी कार्रवाई करने के बाद भी श्रम निरीक्षक रामसेवक नापित रजिस्ट्रेशन के एवज में 15 सौ रुपए की डिमांड कर रहे है।

श्रम निरीक्षक रामसेवक ने रिश्वत की राशि कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड तीन महिपाल मरावी को देने कहा था। रिश्वत की राशि ले रहे महिपाल को टीम ने दबोच लिया था। इस मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई करते हुए श्रम निरीक्षक रामसेवक नापित व लिपिक महिपाल मरावी को भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 7 में तीन-तीन साल की सजा व पांच-पांच हजार रुपए अर्थदंड, भ्रष्टाचार अधिनियम की अन्य धाराओं व धारा 120 बी में चार-चार साल का सश्रम कारावास व पांच-पांच हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।

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