दैनिक भास्कर हिंदी: पूर्व विदर्भ में जलसंकट के आसार : गर्मी से सूख रहा गला, बांधों में पानी कम

April 28th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। पूर्व विदर्भ में सबसे अधिक धूप व जलसंकट की स्थिति बन रही है। तापमान गर्माया हुआ है। पारा 45 के पार चल रहा है। ऐसे में गला सूखने के साथ ही जलस्त्रोतों पर संकट गहराने लगा है। पूर्व विदर्भ के प्रमुख बांधों में पानी की कमी होने लगी है। मौसम िवभाग ने चेतावनी दी है कि अगले सप्ताह भर गर्मी से कोई राहत नहीं मिलनेवाली है। आरेंज अलर्ट जारी किया गया है। रेड अलर्ट जारी करने की स्थिति भी बन रही है। ऐसे में आगजनी की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। लिहाजा आग बुझाने के लिए भी जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है। मिली जानकारी के अनुसार नागपुर विभाग के बड़े बांधों में केवल 9 प्रतिशत पानी शेष रह गया है। नागपुर विभाग में कुल 18 बांध प्रकल्प है। इन प्रकल्पों में जल संचय क्षमता 3553 दस लाख घन मीटर है। 25 अप्रैल तक इन प्रकल्पों में केवल 309 दस लाख घन मीटर अर्थात 9 प्रतिशत पानी बचा है। प्रकल्प निहाय विचार किया जाये तो नागपुर जिले के तोतलाडोह प्रकल्प की क्षमता 1016.9 दस लाख घन मीटर क्षमता है। उसमें 22 दस लाख घनमीटर अर्थात 2 प्रतिशत पानी बचा है। कामठी खैरी की क्षमता 142 दलाघमी है। उसमें केवल 29 प्रतिशत पानी बचा है। रामटेक के खिंडसी में 10 प्रतिशत, लोअर नांद में 3 प्रतिशत , वड़गांव प्रकल्प में 21 प्रतिशत, गोंदिया जिले के इटियाडोह प्रकल्प में 23 प्रतिशत, सिरपुर में 22 प्रतिशत, कालीसरार में 51 प्रतिशत व धापेवाडा बैरेज में 14 प्रतिशत जलसंचय है। चंद्रपुर जिले के असाेलामेंढा प्रकल्प में 32 प्रतिशत पानी है। 

गांवों में हालात और भी गंभीर

जलसंकट को लेकर गांवों में हालात और भी गंभीर है। टैंकर से जलापूर्ति की जाती है। लेकिन शिकायत बढ़ रही है कि टैंकर से जलापूर्ति केवल कागजों में हो रही है। नागरिकों तक टैंकर का संपूर्ण जल पहुंच ही नहीं पा रहा है। ऐसे में राज्य के सचिव ने विशेष बैठक लेकर पेयजल आपूर्ति के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश प्रशासन को दिए है। नागपुर समेत पूर्व विदर्भ के सभी जिलाें में जिला स्तर पर जलापूर्ति योजना का विशेष कक्ष बनाया गया है। उपविभागीय अधिकारी को इस कक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। टैंकरों की निगरानी के लिए जीपीएस सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। यह तय किया जा रहा है कि टैंकर में कहां से , कब और कितना पानी भरा गया। बाद में उसे कहां खाली किया गया। गांव में आवश्यकतानुसार तत्काल प्रस्ताव मंजूर कर बोरवेल खोदने व जलापूर्ति की अन्य उपाययोजना करने के भी निर्देश दिए गए हैं। 

पाइपलाइन में छेद करके, तो कहीं वॉल्व से निकाल रहे पानी

तोतलाडोह बांध में जलस्तर घटने से प्रशासन शहरवासियों को पानी संभलकर उपयोग करने की सलाह दे रहा है। गर्मी होने से पानी की मांग भी बढ़ गई है। ऐसे में जून तक पानी शहरवासियों को पर्याप्त मात्रा में मिल सके, इसके लिए अनेक बैठकें कर चिंतन-मनन किया जा रहा है। इस बीच शहरवासियों के पानी पर चोरों द्वारा डाका डालने का खुलासा हुआ है। कुछ इलाकों में सीधे पाइपलाइन से पानी की चोरी की जा रही है तो कुछ जगह वॉल्व से पानी लेने का मामला सामने आया है। महेंद्र नगर में पानी टंकी के सामने खाली प्लाॅट पर वॉल्व लगा है। यहां वॉल्व को सीधे पाइप लगाकर पानी चोरी का मामला सामने आया है। 2 जगह से पानी चोरी की शिकायत है। रिपब्लिकन नगर, इंदोरा में मनपा की पाइपलाइन में बड़ा छेद कर वहां नया पाइप जोड़कर पानी चोरी किया जा रहा है। विशेष यह कि पानी को बंद करने कोई टोटी या व्यवस्था नहीं होने से दिन भर में लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। यह पानी आगे जाकर नाले में बह रहा है। क्षेत्र में जगह-जगह ऐसे मामले बताए जा रहे हैं। इसकी शिकायतें भी की जा रही है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जो शिकायत करता है, चोरी करने वाले उसे अपना निशाना बना देते है। ऐसे में ज्यादातर लोग शिकायत करने से भी डरते हैं। जिसका फायदा पानी चोरी करने वाली गैंग उठा रही है।

पानी की कमी, अटका बस स्टैंड का काम

गणेशपेठ बस स्टैंड का तेजी से कायाकल्प किया जा रहा था, लेकिन पानी की कमी के कारण अचानक उस पर ब्रेक लग गया है। बस स्टैंड को हाईटेक किया जा रहा है। आगामी दो माह तक पानी नहीं मिलने से बस स्टैंड का काम नहीं हो सकेगा। ऐसे में यात्रियों को सुविधापूर्ण बस स्टैंड के लिए 2 महीने ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा। नागपुर शहर में कुल चार बस स्टैंड बने हैं, जिसमें मुख्य गणेशपेठ बस स्टैंड है। यहां से सबसे ज्यादा बसों का आवागमन होता है। यहां से प्रतिदिन 130 बसें चलती हैं, जिनमें करीब 30 हजार से ज्यादा यात्री विभिन्न दिशाओं की ओर सफर करते हैं। गणेशपेठ बस स्टैंड के नवीनीकरण का काम पिछले 6 माह से किया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार से बजट भी मंजूर हो चुका है। बस स्टैंड को पूरी तरह से हाईटेक बनाया जा रहा है। परिसर में टाइल्स लगाए जा रहे हैं, यात्रियों के बैठने के लिए उत्तम व्यवस्था की जा रही है। नए प्लेटफार्म का निर्माण किया जा रहा है, जिससे ज्यादा से ज्यादा बसें यहां रुक सकें। यात्रियों को खड़े रहने के लिए शेड बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा स्पॉट बुकिंग के लिए अलग से विंडो का निर्माण आदि भी किया जा रहा है। इसके लिए तेजी से काम चल रहा था, लेकिन इस भीषण गर्मी में पानी की कमी के कारण निर्माण कार्य पर असर पड़ने लगा, जिससे काम रोक दिया गया है। अधिकृत सूत्रों के अनुसार पानी की किल्लत के कारण अगले दो माह तक बस स्टैंड का काम नहीं हो सकेगा।