दैनिक भास्कर हिंदी: अधिकारियों के तबादलों में नहीं होगा नेताओं का दखल, हाईकोर्ट में मुख्य सचिव का आश्वासन

December 12th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। सरकारी अधिकारियों के तबादले में मंत्रियों व नेताओं का दखल नहीं होगा। अधिकारियों का स्थानांतरण तबादले को लेकर बनाए गए कानून के तहत ही किया जाएगा। बुधवार को राज्य के मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन ने बांबे हाईकोर्ट को यह आश्वासन दिया है। सरकारी वकील अभिनंदन व्याज्ञानी की ओर से पेश किए गए हलफनामे में साफ किया गया है कि सरकारी अफसरों के तबादले में मंत्रियों व नेताओं का प्रभाव नहीं होगा। मामला उप विभागीय अधिकारी बीवी टिडके से जुड़ा है। जिनके तबादले को लेकर राज्य के मंत्री गिरीष महाजन व विधायक मनीषा चौधरी ने मुख्यमंत्री  को सिफारिशी पत्र लिखा था। तबादले के विषय में मंत्री व विधायक के पत्र को देखने के बाद हैरानी जाहिर करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को टिडके के तबादले के मामले की जांच कर हलफनामा दायर करने को कहा था। जिसके तहत उन्होंने हलफनामा दायर किया है।

न्यायमूर्ति अभय ओक व न्यायमूर्ति एसके शिंदे की खंडपीठ ने मुख्य सचिव के इस हलफनामे पर गौर करने के बाद कहा कि हम आशा व विश्वास रखते हैं कि सरकारी अधिकारियों के तबादले कानून के तहत किए जाएंगे। तबादले के समय मंत्री व नेताओं की सिफारिश पर गौर नहीं किया जाएगा और तबादलों में उनका प्रभाव नहीं होगा। खंडपीठ ने कहा कि मुख्य सचिव की ओर से दिए गए आश्वासन की जानकारी सभी संबंधित लोगों को भी दी जाए। टिडके ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने तबादले को लेकर 3 फरवरी 2018 के आदेश को चुनौती दी है। जिसके तहत उनका तबादला  किया गया है। तबादले के आदेश को टिडके ने पहले महाराष्ट्र प्रशासकीय न्यायाधिकरण में चुनौती दी थी लेकिन न्यायाधिकरण ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। लिहाजा उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 

सुनवाई के दौरान टिडके के वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल ने कभी विधायक व मंत्री के पास तबादले को लेकर संपर्क नहीं किया था और न ही इस संबंध में कोई आग्रह किया था। किंतु मामले से जुड़े रिकार्ड पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने पाया कि विधायक चौधरी व मंत्री महाजन में टिडके की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। क्योंकि जब तबादले की सूची बनी थी तो उसमें टिडके का नाम ही नहीं था। इन दोनों के पत्र के बाद तबादले की सूची में बदलाव किया गया है। खंडपीठ ने कहा कि इस बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता है कि टिडके ने विधायक व मंत्री से संपर्क नहीं किया था। क्योंकि याचिकाकर्ता ने जब मैट मे तबादले के आदेश को चुनौती दी थी तो वहां पर सिफारिश पत्र लिखने वाली विधायक चौधरी व मंत्री महाजन को पक्षकार नहीं बनाया गया था। 

खंडपीठ ने कहा था कि याचिकाकर्ता के कृत्य को देखते हुए उसे कोई राहत नहीं प्रदान कर सकते। वहीं सरकारी वकील ने कहा था कि याचिकाकर्ता के तबादले को लेकर जारी किए गए आदेश को वापस लेते है और नए सिरे से सिविल सर्विस बोर्ड के सामने याचिकाकर्ता के तबादले के प्रस्ताव को रखा जाएगा। इसके साथ ही यह याचिका समाप्त कर दी गई।