दैनिक भास्कर हिंदी: Level 3 की पाबंदियों में मिल सकती है छूट, जानिए - क्यों रद्द हुई औरंगाबाद की दूध परियोजना

July 23rd, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कोरोना नियंत्रण के लिए प्रदेश में लागू तीसरे स्तर (लेबल-3) की पाबंदियों में शिथिलता दी जा सकती है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने इस तरह के संकेत दिए हैं। शुक्रवार को पुणे में टोपे ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. प्रदीप व्यास को कोरोना की वास्तविक स्थिति के बारे में रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। टोपे ने कहा कि राज्य के सभी जिलों में फिलहाल तीसरे स्तर की पाबंदी लागू है लेकिन कई जिलों में कोरोना संक्रमण दर कम हैं। ऐसे जिलों में दुकानों को खोलने का समय बढ़ाते समेत कुछ छूट देने के बारे में रिपोर्ट बनाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग रिपोर्ट तैयार करके मुख्यमंत्री और कोरोना टास्क फोर्स को सौंपेगा। इसके बाद मुख्यमंत्री छूट देने के बारे में अंतिम फैसला करेंगे। 

ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं 

इस बीच टोपे ने कहा कि राज्य में कोरोनाकाल के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण एक भी मरीज की मौत नहीं है। सरकार की ओर से इस बारे में हाईकोर्ट में हलफनामा भी दायर किया गया है। टोपे ने कहा कि देश के दूसरे प्रदेशों में ऑक्सीजन के अभाव में मरीजों की मौत हुई होगी। मैं उस बारे में टिप्पणी नहीं करूंगा। टोपे ने कहा कि नाशिक के एक मनपा अस्पताल में ऑक्सीजन के रिसाव के कारण मरीजों की मौत हुई थी लेकिन वह हादसा है। वहां ऑक्सीजन की कमी नहीं थी। टोपे ने कहा कि संसद में विपक्ष ने ऑक्सीजन के कमी के कारण मौत का मामला उठा रहा है लेकिन किसी सांसद ने महाराष्ट्र का नाम नहीं लिया है। टोपे ने कहा कि राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल यूनिट तैयार की गई है। यह यूनिट गांव स्तर पर बाढ़ की हालत के बाद लोगों के स्वास्थ्य की स्थिति पर नजर रखेगी। टोपे ने कहा कि बाढ़ प्रभावित गांवों में कोरोना का टीकाकरण तेज गति से करने के निर्देश दिए गए हैं।  

राऊत ने सरकार के सुर में सुर मिलाया 

प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी के कारण मौत नहीं होने के स्वास्थ्य मंत्री टोपे के दावे के बाद अब शिवसेना सांसद संजय राऊत ने राज्य सरकार के सुर में सुर मिलाया है। राऊत ने कहा कि यह सच है कि महाराष्ट्र में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है। लेकिन बहुत से राज्यों में ऑक्सीजन न मिल पाने से मरीजों की मौत हुई है। यह ऑन रिकार्ड है। इस बारे में मीडिया में भी खबरें प्रकाशित हुई हैं। इसलिए सरकार को संसद में ऑक्सीजन के अभाव में मरीजों की मौत न होने की जानकारी देने से पहले सोचना चाहिए था। ऑक्सीजन की कमी से मौत न होने को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती पवार के राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब में कोई तथ्य नहीं है। इसलिए राज्यसभा में विपक्ष के सांसदों ने भारती पवार के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। इससे पहले राऊत ने कहा था कि पूरे देश में ऑक्सीजन के अभाव में जिन मरीजों की मृत्यु हुई है उनके परिजनों को केंद्र सरकार के खिलाफ झूठ बोलने का मुकदमा दायर करना चाहिए।

औरंगाबाद की दूध परियोजना हुई रद्द, समय पर पूरी नहीं की गई थी प्रक्रिया 

वहीं प्रदेश सरकार ने औरंगाबाद के फुलंब्री तहसील के राजअमृत मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड संघ की 25 हजार लीटर क्षमता वाली नई दुग्धप्रक्रिया परियोजना को रद्द कर दिया है। सरकार ने राजअमृत मल्टीस्टेट संघ की ओर से परियोजना के कागजी कार्यवाही निश्चित समय में पूरा न किए जाने के कारण यह निर्णय लिया है। शुक्रवार को राज्य के दुग्धव्यवसाय विकास विभाग ने परियोजना की प्रशासनिक मंजूरी रद्द करने संबंधी शासनादेश जारी किया है। इसके तहत सरकार ने दुग्धव्यवसाय आयुक्त को परियोजना के लिए मंजूर 19.90 लाख रुपए की निधि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना कक्ष में वापस करने के लिए तत्काल कार्यवाही करने का कहा है। दरअसल, राज्य सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत राजअमृत मल्टीस्टेट संघ को दुग्ध प्रक्रिया परियोजना लगाने के लिए प्रशासनिक मंजूरी दी थी। इस परियोजना के लिए 3.88 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी। परियोजना के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 50 प्रतिशत निधि दी जाने वाली थी जबकि बाकी 50 प्रतिशत निधि राजअमृत मल्टीस्टेट संघ को लगाना था। लेकिन 6 जनवरी 2021 को दुग्धव्यवसाय विकास आयुक्त ने समीक्षा बैठक में पाया कि राजअमृत मल्टीस्टेट संघ ने परियोजना के लिए आवश्यक कागजात जमा नहीं किए हैं। इसके मद्देनजर औरंगाबाद के प्रादेशिक दुग्धव्यवसाय विकास अधिकारी ने दस्ते के साथ राजअमृत मल्टीस्टेट संघ के परियोजना स्थल का प्रत्यक्ष मुआयना किया। इस दस्ते ने संघ की ओर से परियोजना के डीपीआर के साथ जोड़े गए कागज और प्रत्यक्ष स्थल पर परीक्षण में त्रुटी पाया। इसके बाद प्रादेशक दुग्धव्यवसाय अधिकारी ने राजअमृत मल्टीस्टेट संघ को त्रुटियों को दूर करने के लिए आवश्यक कागजात जमा करने के लिए कुछ समय दिया था लेकिन राजअमृत मल्टीस्टेट संघ की तरफ से संबंधित कागजात जमा नहीं कराए गए। इसके मद्देनजर दुगधव्यवसाय आयुक्त ने सरकार से राजअमृत मल्टीस्टेट संघ के परियोजना को रद्द करने के लिए प्रस्ताव भेजा था जिसके बाद अब सरकार ने राजअमृत मल्टीस्टेट संघ की दुग्धप्रक्रिया परियोजना को रद्द कर दिया है।