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महाराष्ट्र के चुनावी रण में उतरे हैं यह दिग्गज और उनके रिश्तेदार

महाराष्ट्र के चुनावी रण में उतरे हैं यह दिग्गज और उनके रिश्तेदार

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रदेश के वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों का दबदबा बरकरार है। विधानसभा चुनाव के मैदान में 1 मुख्यमंत्री, 2 पूर्व मुख्यमंत्री और 3 पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे और बेटियों की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। जबकि इस चुनावी समर में 2 पूर्व उपमुख्यमंत्री भी कूदे हैं। वहीं दो पूर्व उपमुख्यमंत्रियों की बेटी और पत्नी भी जोर आजमाइश कर रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों के बेटे, बेटी और पत्नी उनकी सियासत को आगे बढ़ा रही हैं। प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भाजपा की ओर से नागपुर दक्षिण-पश्चिम सीट से मैदान में हैं। फडणवीस के मुकाबले में कांग्रेस ने आशीष देशमुख को उम्मीदवारी दी है। इस चुनाव में फडणवीस और देशमुख के बीच टक्कर होगी। फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद का पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है। 

पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को कांग्रेस ने सातारा की कराड-दक्षिण सीट से दोबारा उतारा है। चव्हाण के खिलाफ भाजपा ने डॉ अतुल भोसले को उम्मीदवारी दी है। पृथ्वीराज एक बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। वहीं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण नांदेड़ की भोकर सीट से मैदान में हैं। अशोक चव्हाण के मुकाबले में भाजपा ने बापूसाहब गोरठेंकर को उम्मीदवारी दी है। भोकर सीट से फिलहाल अशोक की पत्नी अमिता चव्हाण विधायक हैं। लेकिन लोकसभा चुनाव हारने के बाद अमिता विधानसभा चुनाव के माध्यम से प्रदेश की राजनीति में लौटने का रास्ता खोज लिया है। अशोक ने दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद की जिम्मेदारी संभाली हैं। अशोक के पिता व शंकरराव चव्हाण भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। 

वहीं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत विलासराव देशमुख के बेटे अमित देशमुख और धीरज देशमुख चुनावी मैदान में हैं। विलासराव के बड़े बेटे अमित लातूर शहर सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। अमित के खिलाफ भाजपा ने शैलेश लौहाटी को प्रत्याशी बनाया है। जबकि विलासराव के छोटे बेटे धीरज देशमुख लातूर ग्रामीण सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। धीरज के सामने शिवसेना से सचिन देशमुख खड़े हैं। लातूर शहर और लातूर ग्रामीण दोनों सीटें फिलहाल कांग्रेस के पास हैं। अमित और धीरज के पिता विलासराव दो बार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे की बेटी प्रणिती शिंदे सोलापुर शहर मध्य सीट से कांग्रेस की उम्मीदवार हैं। प्रणिती के खिलाफ शिवसेना से दिलीप माने उम्मीदवार हैं। प्रणिती के पिता सुशील कुमार एक बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। 

पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के छोटे बेटे नितेश राणे को भाजपा ने सिंधुदुर्ग की कणकवली सीट से टिकट दिया है। नितेश का मुकाबला कांग्रेस के उम्मीदवार सुशील राणे और शिवसेना के बागी सतीश सावंत से है। साल 2014 के विधानसभा चुनाव में नितेश ने कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से जीत हासिल की थी। 

दो पूर्व उपमुख्यमंत्री भी मैदान में

प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से पुणे की बारामती सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। अजित के खिलाफ भाजपा ने गोपीचंद पडलकर को उम्मीदवार बनाया है। अजित दो बार राज्य में उपमुख्यमंत्री पद संभाल चुके हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की तरफ से नाशिक की येवला सीट उम्मीदवार हैं। भुजबल के खिलाफ शिवसेना के उम्मीदवार संभाजी पवार हैं। भुजबल तीन बार प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रहे हैं। 

पिता के बाद बेटी और पति के बाद पत्नी

वहीं प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री रहे दिवंगत गोपीनाथ मुंडे के बेटी व राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री पंकजा मुंडे बीड़ की परली सीट से भाजपा की उम्मीदवार हैं। पंकजा को कड़ी टक्कर देने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने विधान परिषद में विपक्ष के नेता व पंकजा के चचेरे भाई धनंजय मुंडे को मैदान में उतारा है। गोपीनाथ राज्य के एक बार उपमुख्यमंत्री रहे हैं। वहीं राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत आर आर पाटील की पत्नी सुमन पाटील को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने  सांगली की तासगांव-कवठेमहांकाल सीट से दोबारा उम्मीदवारी दी है। सुमन के खिलाफ शिवसेना ने अजितराव घोरपेडे को प्रत्याशी बनाया है। पाटील एक बार राज्य के उपमुख्यमंत्री थे। 

 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।