दैनिक भास्कर हिंदी: मनसुख मौत मामला : NIA जांच के लिए केंद्रीय मंत्री शाह को खत लिखेगी बीजेपी

March 7th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। रिलायंस उद्योग के अध्यक्ष मुकेश अंबानी के घर के पास बीते सप्ताह मिली विस्फोटक लदी स्कॉर्पियों कार के मालिक मनसुख हिरेन के शव मिलने के बाद से प्रदेश में राजनीति गरमा गई है। विपक्षी भाजपा ने प्रदेश की महाविकास आघाड़ी सरकार पर हमला बोला है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा कि इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को ज्ञापन देंगे। शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में पाटील ने कहा कि हम लोग मामले की जांच एनआईए से कराने की मांग कर रहे हैं लेकिन राज्य सरकार विपक्ष के मांग को नहीं मानेगी। सरकार बार-बार कहेगी कि जांच के लिए महाराष्ट्र पुलिस सक्षम है लेकिन हम लोग केंद्रीय मंत्री शाह को ज्ञापन देंगे। क्योंकि मामले में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के अधिकारी सचिन वझे की भूमिका संदेह के घेरे में हैं। वझे और मनसुख से फोन पर हुई बातचीत के सबूत मिले हैं। इसलिए जांच पारदर्शी होनी जरूरी है। पाटील ने कहा कि हम लोग वझे को निलंबत करने की मांग नहीं कर रहे हैं। लेकिन उन्हें मामले की जांच से दूर रखना चाहिए।  

राष्ट्रपति शासन लागू होगा- राणे

जबकि पूर्व मुख्यमंत्री तथा भाजपा सांसद नारायण राणे ने प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मैं राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग के संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखूंगा। राणे ने कहा कि प्रदेश में कानून व सुव्यवस्था नहीं बची है। किसी का भी शव कहीं पर मिल सकता है। प्रदेश की स्थिति भयानक हो गई है। राज्य की जनता सुरक्षित नहीं है। 

 

मुंबई पुलिस सक्षम – राऊत 

वहीं शिवसेना सांसद संजय राऊत ने कहा कि ऐसा नहीं है कि केवल एनआईए की जांच से इस मामले का सत्य सामने आएगा। मुंबई पुलिस मामले की जांच के लिए सक्षम है।  एटीएस इसकी जांच कर रही है। राऊत ने कहा कि विधानमंडल का अधिवेशन शुरू होने के दौरान मनसुख की संदेहास्पद रूप से मौत दुख  दायक है। मनसुख की हत्या हुई है याफिर उन्होंने आत्महत्या की है। इस बारे में लोगों के मन में आशंका है। इसलिए गृह विभाग मामले की सच्चाई जितने जल्दी सामने लाएगा उतना सरकार की प्रतिष्ठा और प्रतिमा के लिए उचित होगा। राऊत ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले विपक्ष की ओर से सरकार को आरोपों के घेरे में रखना उचित नहीं है। विपक्ष इस मामले में राजनीति न करे।  
 

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