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प्रसूता को नवजात बच्चे से किया अलग - प्राइवेट अस्पताल की करतूत , थमाया है मनमाना बिल

प्रसूता को नवजात बच्चे से किया अलग - प्राइवेट अस्पताल की करतूत , थमाया है मनमाना बिल

डिजिटल डेस्क  छतरपुर । शहर के एक प्राइवेट नर्सिंग होम संचालक ने डिलेवरी के बाद मनमाने रुपए का बिल न चुकाने पर प्रसूता और नवजात को चार दिनों से एक दूसरे से जुदा कर रखा है। वर्तमान में नवजात जिला अस्पताल के एसएनसीयू अस्पताल में भर्ती है , वहीं प्रसूता को पैसे न चुका पाने के कारण जबरन नर्सिंग होम में रखा गया है। प्रसूता के पति ने सीएमएचओ डॉ. विजय पथौरिया से पूरे मामले की शिकायत की है। 
नवजात 84 घंटेसे मां के दूध से वंचित
महोबा जिले के खजुरिया पहरा गांव निवासी लीला पति योगेन्द्र कुशवाहा उम्र 22 साल को प्रसूति के लिए जिला अस्पताल महोबा में भर्ती कराया गया था। जहां से सीजर डिलेवरी का बोलकर डॉक्टरों ने प्राइवेट एंबुलेंस से प्रसूता को छतरपुर रैफर कर दिया। एंबुलेंस संचालक ने प्रसूता को जिला अस्पताल न ले जाकर बिजावर नाका स्थित अंजनी हास्पीटल में भर्ती करा दिया। जहां डाक्टरों ने योगेन्द्र से 30 सितम्बर को 13 हजार रूपए लेकर ऑपरेशन कर दिया और ऑपरेशन के दौरान नवजात के ठीक न होने पर उसे मिशन अस्पताल रैफर कर दिया। मगर प्रसूता को डिस्चार्ज नहीं किया। वहीं दूसरी ओर मिशन अस्पताल में योगेन्द्र नेे 20 हजार रुपए देेकर चार दिनों तक बच्चे का इलाज कराया, फिर पैसे खत्म हो जाने पर जिला अस्पताल में नवजात को भर्ती कराया गया। अस्पताल में जब नवजात को मां के दूध की अवाश्यकता हुई तब योगेन्द्र ने पत्नी को डिस्चार्ज करने के लिए कहा, मगर नर्सिंग होम संचालक ने 10 हजार रुपए की और मांग की और पैसे न मिलने तक प्रसूता को डिस्चार्ज करने से मना कर दिया। अब 5 दिनों से प्रसूता अपने नवजात बच्चे के लिए तड़प रही है वहीं नवजात को अपनी मां का दूध नहीं मिल पा रहा है। योगेन्द्र के पास पैसे न होने के कारण वह नर्सिंग होम की मुंहमांगी रकम भी नहीं चुका पा रहा है। 
13 हजार में ही हुआ था सौदा

गेन्द्र ने बताया कि नर्सिंग होम संचालक राजकुमार पटेल से डिलेवरी का 13 हजार में सौदा हुआ था। जो उसने चुका दिए हैं, मगर अब 10 हजार रुपए और मांग रहा है। उधर संचालक राजकुमार पटेल ने बताया कि प्रसूता को जबरन नहीं रखा गया है। अगर पैसे की कोई दिक्कत है तो उन्हें मालूम नहीं है। किसी से भी पता कर लो, नर्सिंग होम में सीजर डिलेवरी में इतने ही रुपए लगते हैं। 
सीएमएचओ से की शिकायत 
योगेन्द्र कुशवाहा ने पूरे मामले की शिकायत सीएमएचओ डॉ. विजय पथौरिया और सीएम हेल्पलाइन पर की है। वहीं सीएमएचओ ने योगेन्द्र से लिखित में पूरे मामले का शिकायती आवेदन सौंपने के लिए कहा है, जिससे इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा सके। सीएम हेल्पलाइन पर भी योगेन्द्र ने नर्सिंग होम के विरूद्ध शिकायत दर्ज कराई है। 
इनका कहना है
प्रसूता के पति ने मौखिक शिकायत की है, जिसे लिखित शिकायत के लिए कहा गया है। ऐसे मामलो में विभाग उचित कार्रवाई करेगा वहीं नर्सिंग होम की भी जांच की जाएगी। 
-डॉ. विजय पथौरिया, सीएमएचओ, छतरपुर
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।