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नागपुर : 10 नए सेंटर पासपोर्ट सेंटर बनने से आवेदकों को मिली बड़ी राहत

नागपुर : 10 नए सेंटर पासपोर्ट सेंटर बनने से आवेदकों को मिली बड़ी राहत

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विदेश दौरा अब आम बात हो गई है ऐसे में पासपोर्ट बनवाने के लिए की जानो वाली प्रक्रियाओं को काफी आसान कर दिया गया है। इसी कड़ी में आवेदकों की सुविधा के लिए विदर्भ सहित अन्य जगह खोले गए 10 पासपोर्ट सेंटर से 30 फीसदी आवेदकों को बढ़ी राहत मिली है। धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। यह 10 पासपोर्ट सेंटर ज्यादातर लोकसभा क्षेत्र में खोले गए है जिसमें विदर्भ के अलावा मराठवाड़ा का हिंगोली जिला भी शामिल है। जानकारी के अनुसार फरवरी 2019 में नागपुर मुख्यालय के अलावा पासपोर्ट के सेंटर को खोला गया था इसका मुख्य उद्देश्य महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्र से नागपुर पहुंचने वाले आवेदकों को वहीं सुविधा उपलब्ध करवाना था जिससे ना सिर्फ आवेदकों को लंबी दूरी तय करना नहीं पड़ेगा बल्कि कई तरह बेफिजूल खर्चे भी नहीं उठाने पड़ेंगे। विशेष बात यह है कि ग्रामीण के 30 फीसदी आवेदक नागपुर आने से बचने लगे और स्थानीय तौर पर अपना पासपोर्ट बनवाने लगे है।

वेटिंग से मिली राहत

विशेष बात यह है कि खर्चे से बचने के अलावा आवेदकों को वेटिंग से राहत मिल गई है। पहले ऑनलाइन आवेदन करने के बाद कई बार एक-एक माह तक की वेटिंग लिस्ट रहती थी जो अब कई बार अगले दिन में आवेदक को बुला लिया जाता है।

यहां खुले पासपोर्ट सेंटर

नागपुर मुख्यालय पहले से ही शहर में स्थापित है इसके अलावा 10 सेंटर खोले गए है जिसमें विदर्भ के अमरावती, अकोला, बुलढाना, यवतमाल, वर्धा, चंद्रपुर, गड़चिरोली, भंडारा और काटोल के अलावा मराठवाड़ा के हिंगोली में पासपोर्ट सेंटर शामिल है।

क्या कहते हैं आंकड़े

वर्ष 2019 में जनवरी से दिसंबर तक 1 लाख 22 हजार 393 आवेदन किए गए। इसमें 38 हजार 221 आवेदन नए खोले गए 10 सेंटरों से प्राप्त हुए है। कुल 1 लाख 18 हजार 963 आवेदकों को पासपोर्ट दिया गया। वहीं वर्ष 2020 में जनवरी से 23 फरवरी तक 18 हजार 683 आवेदन किए गए जिसमें 6 हजार 484 आवेदन नए सेंटर द्वारा किए गए जिसमें 12 हजार 199 नागपुर मुख्यालय से आवेदन किया गया।

नए सेंटर का लाभ

पासपोर्ट अधिकारी सी.एल. गौतम के मुताबिक 10 नए सेंटर खुलने से आवेदक उसका लाभ उठा रहे है और 30 फीसदी आवेदकों को सिर्फ पासपोर्ट बनवाने के लिए नागपुर तक नहीं आना पड़ रहा है हम उनको उनके क्षेत्र में ही सुविधा दे पा रहे है।

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