दैनिक भास्कर हिंदी: पानी की बर्बादी रोकने का पहला प्रयास परिवार से किया, रंग ला रही तरकीब

June 3rd, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शहर इन दिनों भीषण गर्मी के साथ-साथ जल संकट भी झेल रहा है। शहर में फिलहाल जल स्रोतों के डेड स्टॉक से जलापूर्ति की जा रही है। शहर को प्रतिदिन 1.30 एमएमसी (मिलियन मैट्रिक क्यूब) पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में शहर की कुछ जागरूक संस्थाएं व नागरिक अपने-अपने स्तर पर पानी की बचत कर दूसरों के लिए उदाहरण पेश कर रहे हैं। ऐसे उपायों में कई पार्कों में पीने के पानी की व्यवस्था की गई है। पानी की बर्बादी रोकने पर ध्यान देकर उस पानी का उपयोग पौधों को सींचने के लिए किया जा रहा है। कई आवासीय इमारतों में टंकी के ओवरफ्लो होने से होने वाली पानी की बर्बादी रोकने वहां रहने वाले लोग बारी-बारी यह जिम्मेदारी निभाते हैं। ये उपाय भले ही छोटे लगें, लेकिन पानी बचाने का संदेश जरूर आगे बढ़ा रहे हैं।

सोसाइटी ने बांटी जिम्मेदारी
हमारी सोसाइटी में आए दिन टंकी के ओवरफ्लो होने से पानी बहता रहता था। पानी की बर्बादी किसी को अच्छी नहीं लगती थी। आखिर सोसाइटी की महिलाओं ने यह जिम्मेदारी लेने की ठान ली। अब हर दिन सोसाइटी की एक महिला की यह जिम्मेदारी होती है कि टंकी भरने पर मोटर तत्काल बंद किया जाए। इसके साथ ही किसी के घर नल खुला होने पर पानी बहने पर फाइन भी लगाया जाता है। 
- रवि प्रकाश जाजू, सचिव जयदीप अपार्टमेंट 

बचे पानी का उपयोग पौधों के लिए
हमारे महिला मंडल की सभी सदस्याएं किचन में सब्जी व अन्य खाद्य सामग्री धोने में इस्तेमाल होने वाले पानी का उपयोग घर के गमलों में डालने के लिए करती हैं। इस तरह पानी का सदुपयोग भी हो जाता है और पौधों को कुछ पोषण तत्व भी मिल जाते हैं। 
- रेखा बोरकर, स्वाभिमानी महिला मंडल

नल शुरू रख नहीं करते ब्रश
हमारे घर सभी को नल चलाकर ब्रश करने की आदत थी। मेरी कक्षा चार में पढ़ने वाली बेटी पायल कई बार हमें टोकती पर कोई उसकी बातों पर गौर नहीं करता। हाल ही उसने टीवी पर पानी की बचत का विज्ञापन देखा और किसी को नल खुला रख ब्रश करते देखती है, तो उसे पानी से भरी बोतल देकर कहती है, आप तो बड़े हैं फिर भी पानी बर्बाद करते हैं। उसकी कोशिश अब रंग लाई है। अब हमारा परिवार हर वह उपाय अपना चुका है, जिससे पानी की बर्बादी रोकने में मदद मिलती है।
- निशा शर्मा, हनुमान नगर