दैनिक भास्कर हिंदी: पहाड़ सिंह के समर्पण से हिलीं नक्सल आंदोलन की जड़ें, नक्सल एक्टिविटी का अहम किरदार

August 24th, 2018

डिजिटल डेस्क, गड़चिरोली। खूंखार नक्सली के रूप में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य में परिचित पहाड़ सिंह ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग के आईजी के समक्ष समर्पण कर दिया। उसके इस कदम से नक्सल आंदोलन की जड़ें हिल गई हैं। बता दें कि, खूंखार नक्सली पहाड़ सिंह ने वर्ष 2003 से 2015 तक गड़चिरोली जिले की सीमा में सक्रिय रहकर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में कई विध्वसंक घटनाओं को अंजाम दिया। उस पर तीनों सरकारों ने तकरीबन 47  लाख रुपए का इनाम रखा था।

जानकारी के अनुसार, उत्तर गड़चिरोली व गोंदिया विभाग के कमांडर के रूप में कार्य करते समय पहाड़ सिंह ने 15 वर्षों के कार्यकाल में कई हत्याओं व विध्वसंक घटनाओं को अंजाम दिया। दलम में उसकी सक्रियता व कार्यशैली को देख उस पर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ की स्पेशल जोनल कमेटी में सदस्य की जिम्मेदारी सौंपी गई। पहाड़ सिंह के साथ हर समय तीन गनमैन रहा करते थे। पहाड़ सिंह को अशोक उर्फ टीपू सुलतान और बाबूराव तोफा के नाम से भी जाना जाता था। तीनों राज्यों में उसके खिलाफ 60 से अधिक प्रकरण दर्ज हैं। गड़चिरोली पुलिस ने उस पर 16 लाख तो छत्तीसगढ़ व मध्यप्रदेश पुलिस ने उस पर 31 लाख रुपए का इनाम रखा था। उसके समर्पण से तीनों राज्यों में सक्रिय नक्सल आंदोलन फिर एक बार बैकफुट पर दिखाई दे रहा है। 

मूलत: छत्तीसगढ़ है पहाड़सिंह
खूंखार नक्सली पहाड़सिंह मूलत: छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगांव जिले के फाफामार गांव का निवासी है। वर्ष 2001 से 2003 की अवधि में उसकी पत्नी शकुनीबाई गांव की सरपंच थी। गांव में विकास कार्यों को लेकर पहाड़सिंह, उसकी पत्नी व ग्रामीणों में विवाद हुआ। तब ग्रामीणों ने शकुनीबाई के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया। इस निर्णय से निराश होकर पहाड़सिंह ने हाथों में बंदूक ली। गड़चिरोली के तत्कालीन एसपी मो. सुवेज हक ने वर्ष 2013 में  सहयोगियों के साथ फाफामार गांव जाकर पहाड़सिंह के परिवार को जीवनावश्यक सामग्री दी व पहाड़सिंह से समर्पण करने की अपील की।

पुलिस विभाग द्वारा दिखाए गए अपनेपन से पहाड़ सिंह ने समर्पण करने का मन बना लिया, लेकिन उसके साथ तीन गनमैन होने की वजह से वह ऐसा कर नहीं पा रहा था। गुरुवार को नक्सली आंदोलन से फरार होकर पहाड़सिंह ने छग के दुर्ग आईजी के समक्ष समर्पण किया। समर्पण करते समय उसके पास कोई हथियार नहीं था। छग पुलिस ने उसके समर्पण को मंजूर कर लिया है।  

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