दैनिक भास्कर हिंदी: जलनिकासी व कचरा मुक्ति पर NMC ने नहीं किए 567 करोड़ खर्च, बदतर हुए शहर के हालात

August 21st, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। जल निकासी व कचरा मुक्ति पर मनपा द्वारा राशि खर्च करने में चूकने से बारिश के दिनों में हालात बदतर होते जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सख्ती दिखाते हुए महानगरपालिका प्रशासन को अनेक निर्देश दिए। यहां तक कि दूषित जल निकासी व कचरा मुक्ति पर खर्च करने के लिए बजट में 25 प्रतिशत राशि का प्रावधान कराया, लेकिन मौजूदा स्थिति में 10 फीसदी राशि भी इन अहम विषयों पर खर्च नहीं की जा रही है। दूसरे शब्दों में कहें तो शहर के विविध विकास कार्यों के लिए बजट बनाते समय अब उक्त नियम का पालन होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। यही कारण है कि अचानक अत्यधिक बारिश होने की दशा में शहर की मौजूदा जल निकासी व्यवस्था ठप हो जाती है।

मनपा के बीते वर्ष के 2271 करोड़ के बजट में भले ही शहर में अनेक विकास कार्य किए गए हो, परंतु जल निकासी व कचरा मुक्ति के लिए 25 प्रतिशत निधि खर्च नहीं की जा सकी। करीब 567.75 करोड़ निधि इस विषय पर खर्च किया जाना चाहिए।

बनाए गए थे नियम
शहर के कचरे प्रबंधन व दूषित पानी को रोकने की जिम्मेदारी मनपा प्रशासन की होती है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जनहित को ध्यान में लेते हुए वर्ष 2014 में कुछ नियम तैयार किए थे। इसके अनुसार मनपा को कुल बजट का 25 फीसदी हिस्सा दूषित जल निकासी एवं कचरा मुक्ति पर खर्च करने का बंधनकारक नियम बनाया गया। मनपा के सर्वसाधारण सभा में तय अनुसार बजट को मंजूर कराकर संबंधित प्रस्ताव को महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल को पेश करने के निर्देश दिए गए। 

और होती गई अनदेखी
मनपा के जल(प्रदूषण, प्रतिबंध व नियंत्रण)अधिनियम 1974 व धारा 31 अ, हवा (प्रदूषण, प्रतिबंध व नियंत्रण) अधिनियम 1981 के साथ नागरी घनकचरा(व्यवस्थापन) नियम 2000 के आधार पर मनपा को प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर कृति रिपोर्ट पेश करना बंधनकारक है। 6 जून 2014 को प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने मनपा को पत्र लिखकर कचरे को पृथक कर उसका प्रबंध करने तथा जल निकासी करना बंधनकारक होने के निर्देश दिए थे। तब से यह परंपरा शुरू तो हुई, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, इस नियम की अनदेखी की जाने लगी।

प्रशासन उदासीन
बीते दिनों तेज बारिश के बाद शहर में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे। अचानक चंद घंटों में हुई जोरदार बारिश ने प्रशासन के आपदा प्रबंधन व जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी थी। करीब 261 मिलीलीटर बारिश के बाद जब राहत कार्य शुरू हुआ तो मनपा में जांच, समीक्षा, दौरे, मीटिंग, मूल्यांकन, आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल पड़ा। इस बीच प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा तय नियमों के अनुसार बजट बनाने व 25 प्रतिशत निधि इसी एकमात्र विषय पर खर्च करने को लेकर किसी ने भी गंभीरता से विचार नहीं किया।

इसलिए भुगतना पड़ रहा खामियाजा
बीते वर्ष नागपुर मनपा का बजट 2271 करोड़ था। तय अनुसार 25 फीसदी राशि अर्थात 567.75 करोड़ रुपए दूषित जल निकासी एवं कचरा मुक्ति पर खर्च किया जाना चाहिए था, लेकिन इसके लिए विशेष ‘हेड’ तैयार कर इसका मूल्यांकन नहीं किए जाने के कारण असल आंकड़ा संबंधित प्रशासन के पास भी उपलब्ध नहीं है। दूषित जल निकासी विषय का उल्लेख जहां-जहां किया गया है, वहां की कुल योजनाओं को जोड़ने पर इस पर खर्च की गई राशि 47 करोड़ रुपए से अधिक नहीं है। वर्ष 2018-19 के लिए मनपा का बजट 2946 निर्धारित किया गया।

इस बजट में तय प्रावधान के अनुसार 736.5 करोड़ रुपए उक्त विषय पर खर्च करना बंधनकारक है। परंतु बीते 3 वर्षों से इस गंभीर मसले पर बरती जा रही लापरवाही को देखते हुए लगता है कि इस वर्ष भी महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के तय नियमों एवं निर्देशों का पालन मनपा प्रशासन द्वारा नहीं किया जाएगा। ऐसे में वायु तथा जल प्रदूषण के अलावा बाढ़ जैसी स्थिति से निपटना मुश्किल होगा।