दैनिक भास्कर हिंदी: अब शेर और बाघ को भी ले सकेंगे गोद! सफारी प्रबंधन ने भेजा प्रदेश सरकार को प्रस्ताव 

July 20th, 2019

डिजिटल डेस्क, सतना। वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है कि आने वाले दिनों में अपनी पसंद के वन्यजीवों को गोद ले सकेंगे। यह योजना व्हाइट टाइगर सफारी एंड जू में मौजूद वन्यजीवों पर लागू होगी। इस सम्बंध में सफारी प्रबंधन ने वन मंत्रालय मध्यप्रदेश शासन को विस्तृत प्रस्ताव बनाकर भेजा है। उम्मीद की जा रही है कि शीघ्र ही इसकी अनुमति भी मिल जाएगी। प्रस्ताव के मुताबिक वन्यप्राणी अंगीकार योजना में वह लोग शामिल हो सकेंगे, जो वन्यजीवों के भोजन आदि पर होने वाले खर्च को बहन करेंगे। हालांकि सफारी प्रबंधन की ओर से वन्यप्राणियों के भोजन व रख-रखाव पर होने वाले व्यय का आकलन प्रस्ताव के साथ भेजा गया है। किन्तु अंतिम निर्णय राज्य शासन को ही करना है। अनुमति मिलते ही योजना अमल में आ जाएगी। इस योजना के तहत वन्यप्राणियों को गोद लेने वाले लोगों को सफारी प्रबंधन की ओर से विशेष रियायतें मुहैया करााए जाने का प्रावधान है। गोद लेने वाले लोग न केवल स्वयं बल्कि अपने परिवारजनों व अतिथियों के साथ जू और सफारी का भ्रमण नि:शुल्क कर सकेंगे।  

लायन और टाइगर सबसे मंहगे 
वन्यप्राणी अंगीकार योजना में जू के 15 प्रजातियों के जानवरों को शामिल किया गया है। सभी के लिए वार्षिक से लेकर त्रैमासिक अवधि की योजना है। भेजी गई दरों के मुताबिक एक व्हाइट टाइगर, एक रायल बंगाल टाइगर व एक लायन का एक दिन के भोजन का खर्च औसतन 11 सौ रुपए है। यह जीव आमतौर पर 12 किलो मीट एक दिन में खा जाते हैं। जिस दिन चिकन दिया जाता उस दिन का खर्च और बढ़ जाता है। इसके अलावा दूसरे क्रम में पेंथर आता है, जिसे प्रतिदिन खर्च के लिए 450 रुपायों की जरूरत पड़ती है। भालू को दलिया, दूध, खजूर व शहद के लिए 3 सौ रुपए हर रोज की दरकार होती है, यह खब्बू जीवदिन में तीन बार खाता है। 

मिलेंगी ये सुविधाएं 
वन्यप्राणियों के प्रति लगाव तथा उनसे नजदीकी दर्शाने के लिए शुरू की गई योजना में जो लोग शामिल होंगे, उन्हें सफारी प्रबंधन द्वारा विशेष रूप से आनर के तौर पर कुछ सुविधाएं देगा। मसलन ऐसे लोग समय-समय पर अपने परिवार जनों, अतिथियों को लेकर सफारी व जू का भ्रमण करा सकेंगे, उनको निर्धारित साी शुल्क में छूट रहेगी। कोई भी व्यक्ति एक माह से लेकर एक वर्ष तक के लिए वन्यप्राणी अंगीकार योजना का सदस्य बन सकेगा, यह उस व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर होगा। 

इनका कहना है
वन्यप्राणी एडाप्सन स्कीम के लिए प्रदेश शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जैसे ही मंजूरी मिलेगी, योजना अमल में आ जाएगी। राजीव मिश्र वन संरक्षक
 

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