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  • Now Marathi films will also be made in Uttar Pradesh, grants for languages ​​other than Hindi-Bhojpuri

नई फिल्मसिटी: अब उत्तर प्रदेश में भी बनेंगी मराठी फिल्में, हिंदी-भोजपुरी के अलावा दूसरी भाषाओं के लिए भी अनुदान  

December 21st, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। फिल्मों की शूटिंग के मामले में उत्तर प्रदेश की भूमि को विकल्प बनाने में जुटी योगी सरकार हिंदी, भोजपुरी, बुंदेलखंडी व अवधि भाषा के अलावा मराठी सहित सभी क्षेत्रिय भाषाओं की फिल्मों के लिए अनुदान देगी। कुछ निर्माताओं ने यूपी में मराठी फिल्मों के निर्माण में रुचि दिखाई है। फिलहाल उत्तर प्रदेश फिल्म बंधु के पास 300 फिल्मों के निर्माण के प्रस्ताव आए हैं।  फिल्म बंधु के उप निदेशक दिनेश सहगल ने  ‘दैनिक भास्कर’ को बताया कि राज्य में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना विभाग के तहत कार्यरत ‘फिल्म बंधु’ की तरफ से ढाई करोड़ रुपए तक बतौर अनुदान दिया जाता है। अनुदान राशि प्रदेश में फिल्मों की शुटिंग के दिन पर निर्भर है। पूरी फिल्म की शुटिंग यूपी में किए जाने पर अधिक अनुदान मिलता है। इसके अलावा फिल्म के मुख्य पांच कलाकार यदि उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं तो 25 लाख रुपए अतिरिक्त दिया जाता है। उन्होंने बताया कि 2017 से अब तक 38 फिल्मों के लिए अनुदान दिया गया है और 47 फिल्मों को अनुदान देने जा रहे हैं, जबकि फिल्मबंधु के पास 300 फिल्मों के प्रस्ताव आए हैं इसमें मराठी व तमिल भाषा की फिल्में भी शामिल हैं। फिल्म पटकथा मंजूरी समिति ने 2017 से अब तक 230 फिल्मों के स्क्रिप्ट को मंजूरी दी है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में सौ से अधिक फिल्मों की शुटिंग चल रही है।  

एक हजार एकड़ में फिल्मसिटी

बॉलीवुड यानि हिंदी फिल्म उद्योग के लोगों को न्यौता देने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ मुंबई भी आ चुके हैं। मुंबई फिल्म इंडस्ट्री यानी बॉलीवुड तो यूपी ले दाने की कोशिश को लेकर विवाद भी पैदा हुआ था। इस बीच नोयडा में 1 हजार एकड क्षेत्रफल में फिल्मसिटी बनाने के लिए टेंडर निकाला गया है। श्री सहगल ने बताया कि इस फिल्म सिटी को ‘स्टार्ट टू फिनिश’ के मापदंड पर तैयार किया जाएगा। यानि एक बार फिल्मसिटी में आए तो पूरी फिल्म तैयार करने की सारी व्यवस्था होगी। इसे दो साल के भीतर शुरु करने की योजना है। फिल्म सिटी में 10,000 करोड़ से अधिक का निवेश अनुमानित है। फिल्म सिटी में भूमि के लिए प्रदेश सरकार धनराशि नहीं लेगी, बल्कि जमीन को लाइसेंस पर देने की व्यवस्था की जाएगी। दी गई भूमि के लिए वार्षिक किराया निर्धारित किया जाएगा।