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साल की पहली सोमवती अमावस्या 12 को, स्नान-दान का विशेष महत्व

साल की पहली सोमवती अमावस्या 12 को, स्नान-दान का विशेष महत्व

कोरोना महामारी के चलते घरों पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करने से पुण्य फल की प्राप्ति
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
इस साल की पहली सोमवती अमावस्या 12 अप्रैल को पड़ रही है। सोमवार को पडऩे वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। ऐसा संयोग साल में 2 या कभी-कभी 3 बार भी बन जाता है। इस अमावस्या को हिन्दू धर्म में पर्व कहा गया है। पं. रोहित दुबे ने बताया कि इस दिन पूजा, पाठ, व्रत, स्नान और दान करने से कई यज्ञों का फल मिलता है। इस दिन तीर्थ स्नान करने से कभी खत्म नहीं होने वाला पुण्य मिलता है, लेकिन कोरोना महामारी के चलते घरों पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूँदें मिलाकर नहाने से भी तीर्थ स्नान का फल मिलता है।  इस साल की दूसरी और आखिरी सोमवती अमावस्या 6 सितंबर को आएगी। 
पवित्र नदियों में स्नान करने से सुखों की प्राप्ति
महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ और सभी दु:खों से मुक्त होगा। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन स्नान करने से पितर भी संतुष्ट हो जाते हैं।
अमावस्या पर पीपल की पूजा- पं. राजकुमार शर्मा पीपल के अनुसार पेड़ पर पितर और सभी देवों का वास होता है। सोमवती अमावस्या के दिन जो दूध में पानी और काले तिल मिलाकर सुबह पीपल को चढ़ाते हैं, उन्हें पितृदोष से मुक्ति मिल जाती है। इसके बाद पीपल की पूजा और परिक्रमा करने से सभी देवता प्रसन्न होते हैं। ऐसा करने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। 
सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ का संकल्प
श्री राम मानस महिला मंडल संजीवनी नगर द्वारा महामारी को खत्म करने के लिए श्री अर्धनारीश्वर मंदिर प्रांगड़ में कोरोना के नियमों का पालन करते हुए 21 हनुमान चालीसा पाठ कर प्रार्थना की गई। सवा लाख हनुमान चालीसा का पाठ घर-घर एवं मंदिरों में करने का संकल्प लिया गया। मंडल अध्यक्ष संध्या दुबे ने बताया कि संकट काल में राम नाम एवं हनुमान संकीर्तन कर निरंतर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। इस दौरान उमा सिसोदिया, शशि खरे, सुनीता केशरवानी, कल्पना तिवारी, अनिता दुबे, रमा वर्मा, अनिता नामदेव मौजूद रहीं।
 

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