दैनिक भास्कर हिंदी: नागपुर यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज में 700 विद्यार्थियों पर सिर्फ तीन शिक्षक, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

September 27th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के डॉ बाबासाहब आंबेडकर लॉ कॉलेज में कई वर्षों से शिक्षकों के पद रिक्त हैं। यह मुद्दा बुधवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई में उस वक्त पेश किया गया। जब लॉ कॉलेज के ही कुछ विद्यार्थियों ने अपनी मध्यस्थी अर्जी दायर की। विद्यार्थियों के अधिवक्ता आनंद परचुरे ने हाईकोर्ट को जानकारी दी कि सबसे पुराने लॉ कॉलेजों में एक कॉलेज में कई वर्षों से शिक्षकों का टोटा है। पदभर्ती ना होने से स्थिति कुछ यूं हो गई है कि कॉलेज के 700 विद्यार्थियों पर एक प्राचार्य और दो मान्यता प्राप्त शिक्षक ही हैं। बाकि काम कांट्रिब्यूटरी शिक्षकों के सहारे चल रहा है। जिसका बुरा असर कॉलेज की शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट ने प्रतिवादी नागपुर विश्वविद्यालय और राज्य उच्च शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर लॉ कॉलेज में पदभर्ती पर अपनी भूमिका स्पष्ट करने को कहा है।

गुरुनानक स्कूल को संचालित करना चाहती है शिक्षकों की संस्था 

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने बुधवार को राज्य शिक्षा विभाग से पुछा है कि वे बेजनबाग स्थित गुरुनानक स्कूल को संचालित करने की जिम्मेदारी उत्कर्ष शिक्षा संस्था को क्यों ना दें ? दरअसल दी सिख एजुकेशन सोसाइटी ने अपना यह स्कूल बंद करने का निर्णय लिया है। जिसके खिलाफ यह याचिका दायर की गई है। मामले में पहले तो हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्वयं पुछा था कि क्या सरकार इस स्कूल को चलाएगी, मगर बाद में कोर्ट ने अन्य शिक्षा संस्थाओं को स्कूल संचालन का जिम्मा उठाने के लिए आगे आने को कहा था। ऐसे में स्कूल के शिक्षकों ने उत्कर्ष शिक्षा संस्था गठित करके हाईकोर्ट में चल रहे इस मामले में मध्यस्थी अर्जी दायर करके स्कूल संचालित करने की तैयारी दिखाई। जिसपर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अपनी भूमिका स्पष्ट करने को कहा है।

हाईकोर्ट ने दी थी बंद करने की अनुमति

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों हाईकोर्ट ने दी सिख एजुकेशन सोसाइटी को यह स्कूल बंद करने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने शिक्षा विभाग को स्कूल के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए पर्यायी व्यवस्था करने को भी कहा था। स्कूल बंद होने की बात पर मुहर लगने के बाद विद्यार्थियों और पालको ने रैली निकाल कर विरोध किया था। याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत 6-14 वर्ष के विद्यार्थियों अनिवार्य शिक्षा मिलनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने राज्य मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडणवीस को निवेदन सौंप कर स्कूल के अधिकार लेने की मांग की थी।