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क्वारेंटाइन सेंटर में तैनात कोरोना योद्धाओं में 30% की ही जांच

क्वारेंटाइन सेंटर में तैनात कोरोना योद्धाओं में 30% की ही जांच

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कोरोना संक्रमितों की तेजी से बढ़ रही संख्या को देखते हुए ‘कोरोना योद्धाओं’ की चुनौतियां बढ़ गईं हैं, लेकिन एक लापरवाही भी सामने आ रही है। क्वारेंटाइन सेंटर में तैनात अधिकांश ‘कोरोना योद्धाओं ने खुद की स्वास्थ्य जांच नहीं कराई है, जबकि  मनपा प्रशासन की ओर से यह व्यवस्था की गई है। जानकारी के अनुसार, 30 फीसदी ही मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ ने अपनी जांच कराई है। 

अनेक को पता नहीं

क्वारेंटाइन सेंटराें से चौकानेवाली जानकारी यह भी मिली है कि अधिकांश कर्मचारियों को सेंटर में टेस्ट कराने की व्यवस्था होने की जानकारी ही नहीं। प्रशासन की तरफ से इस संदर्भ में बताया भी नहीं गया है। 

स्टाफ के विवेक पर है टेस्ट करना 

राम जोशी, अतिरिक्त आयुक्त, मनपा के मुताबिक मेडिकल, पैरामेडिकल या अन्य स्टाफ चाहें तो ही उनकी टेस्ट की जा सकती है। स्वास्थ्य जांच या स्वैब का टेस्ट स्टाफ के विवेक पर निर्भर है। जो कर्मचारी जांच कराना चाहता है, उनकी जांच की जाती है। संदिग्धों के संपर्क में आनेवाले स्टाफ को स्वयं स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। 

क्वारेंटाइन सेंटर में स्वास्थ्य विभाग, मनपा, मेयो, मेडिकल, राजस्व, लोक कर्म विभाग व नासुप्र के अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं। मेडिकल व पैरामेडिकल के कुछ स्टाफ ने अपने स्वैब दिए, लेकिन अधिकांश ने इसे उचित नहीं समझा। बता दें कि इसके लिए उसे क्वारेंटाइन होने की भी जरूरत नहीं है। रिपोर्ट पाॅजिटिव आने के बाद ही क्वारेंटाइन होना पड़ेगा।  

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