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कम सीटें मिलने का दर्द, उद्धव ने कहा - दशहरा सम्मेलन में बोलूंगा

कम सीटें मिलने का दर्द, उद्धव ने कहा - दशहरा सम्मेलन में बोलूंगा

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य से इस्तीफा देने वाले चंद्रकांत रघुवंशी ने शिवसेना में प्रवेश कर लिया है। बुधवार को मातोश्री में शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में रघुवंशी ने पार्टी में प्रवेश किया। शिवसेना ने रघुवंशी को नंदूरबार की अक्कलकुवा सीट से उम्मीदवार दी है। पत्रकारों से बातचीत में उद्धव ने कहा कि शिवसेना ने संगठन की दृष्टि से आदिवासी बहुल नंदूरबार की अनदेखी की थी। लेकिन अब मैं खुद नंदूरबार में चुनाव प्रचार के लिए जाऊंगा। भाजपा और शिवसेना के बीच सीटों के बंटवारे में शिवसेना को कम सीटें मिलने को लेकर उद्धव ने कहा कि मैं अभी किसी विषय पर कुछ नहीं बोलूंगा। शिवसेना की परंपरा के अनुसार 8 अक्टूबर को दादर के शिवतीर्थ पर दशहरा सम्मेलन का आयोजन होगा। इसी सम्मेलन में मैं सभी मुद्दों पर अपनी बात रखूंगा।  

मैं नहीं कहूंगा कि आदित्य का चुनाव निर्विरोध हो

उद्धव ने कहा कि मेरे बेटे व युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे को शिवसैनिकों ने स्वीकार कर लिया है। इसके लिए मैं सभी शिवसैनिकों को धन्यवाद देता हूं। आदित्य की पूरी जवाबदारी अब शिवसैनिकों की है। उद्धव ने कहा कि मैं किसी दल से यह नहीं कहने जाऊंगा कि वरली सीट पर आदित्य का चुनाव निर्विरोध करने के लिए उम्मीदवार नहीं उतारे। उद्धव ने कहा कि मेरे पिता बालासाहब ठाकरे ने मुझसे कहा था कि यदि आपको राजनीति के क्षेत्र में जाना है तो मैं आपको शिवसैनिकों पर थोपूंगा नहीं और रोकुंगा भी नहीं। यदि शिवसैनिकों ने आपको स्वीकार कर लिया तो आप आगे बढ़िए। 

बागियों को मानने की कोशिश 

टिकट नहीं मिलने से नाराज शिवसेना के बागी नेताओं की मातोश्री के बाहर लगातार भीड़ देखी जा रही है। बुधवार को मातोश्री के बाहर खड़े पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ने कहा कि भाजपा और शिवसेना की युति है। युति की सत्ता आएगी। सत्ता आने के बाद जिसको-जिसको मुझे अवसर देना संभव होगा। मैं उसको सत्ता में मौका दुंगा। 

कम सीटें मिलने का झलका दर्द

भाजपा के मुकाबले शिवसेना को कम सीटें मिलने को लेकर उद्धव ने भले ही कुछ नहीं बोला है लेकिन शिवसेना के मुखपत्र में पार्टी को कम सीटें मिलने का दर्द छलका है। शिवसेना ने परोक्ष रूप से भाजपा को बड़ा मान लिया। पार्टी ने कहा कि शिवसेना के बारे में यह मानना पड़ेगा कि लेना कम और देना ज्यादा हुआ। विधानसभा चुनाव में शिवसेना लगभग 125 सीटों पर लड़ेगी। भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पार्टी बन चुकी है। कई पार्टियों के प्रमुख लोग भाजपा के चौखट पर बैठे हैं। उनकी मेहमाननवाजी के लिए शिवसेना ने अपना दिल बड़ा करके इसे स्वीकार किया है। 
 

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