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पतपेढी के जमाकर्ताओं को भी देना होगा इनकम टैक्स, बैंकों की एफडी पर मिले ब्याज पर पहले से लगता है कर 

पतपेढी के जमाकर्ताओं को भी देना होगा इनकम टैक्स, बैंकों की एफडी पर मिले ब्याज पर पहले से लगता है कर 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। अब बैंकों में जमा एफडी की तरह पतपेढी में निवेश पर भी इनकम टैक्स देना होगा। केंद्र सरकार ने नए निर्देश से पतपेढी संचालक मुश्किल में दिखाई दे रहे हैं। केंद्र सरकार ने सहकारी पत संस्थाओं के लिए भी धारा 194 (अ) लागू कर दिया है। अब तक यह केवल बैंकों के लिए लागू था। जिस पतपेढी का लाभ व हानी 50 करोड़ से अधिक होगा, ऐसी पतपेढी के सदस्यों व जमाकर्ताओं से इनकम टैक्स वसूला जाएगा। जमाकर्ताओं से टैक्स वसूलने की जिम्मेदारी पतपेढी संचालकों पर सौपी गई है। जमाकर्ताओं के जमा पर 40 हजार से अधिक ब्याज मिलने पर ब्याज के तौर पर मिली रकम पर आयकर देना होगा। वरिष्ठ नागरिकों को थोड़ी छूट दी गई है। ब्याज की रकम 50 हजार रुपए से अधिक होने पर ही वरिष्ठ नागरिकों को कर देना होगा। 

ज्ञानदीप कॉआपरेटिव क्रेडिट सोसाईटी के अध्यक्ष जिजाबा पवार ने बताया कि केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से 13 मई 2020 तक 10 फीसदी और 14 मई से 31 मार्च 2021 तक साढे सात फीसदी टीडीएस काटने का निर्देश दिया है। साथ ही केंद्र सरकार ने पतपेढीयों पर एक और शर्त लगाई है। एक पतपेढी की सभा शाखओं द्वारा एक बैंक से 1 करोड़ से अधिक की रकम निकालने पर संबंधित बैंक 2 फीसदी टीडीएस काटेगा। पवार का कहना है कि इन नए नियमों से पतपेढी संचालक परेशान हैं। बता दें कि राज्य के 13568 पत संस्थाओं में 2 करोड़ 5 लाख 15242 सदस्य हैं। इन पत संस्थाओं में 65 हजार 778 करोड़ रुपए एफडी है। 

बैंक के जमाकर्ताओं को पहले से देना पड़ता है टीडीएस

बैंकों से ब्याज के तहत अर्जित धन आयकर के तहत आता है। ब्याज राशि पर टैक्स देना होता है। बैंक एफडी पर ब्याज से अर्जित आय का आकलन करती है। यदि ब्याज इनकम 10,000 रुपए से ज्यादा होती है तो वह टीडीएस के दायरे में आ जाती है। यानी 10 हजार की राशि से ज्यादा ब्याज आय पर टीडीएस कटौती की जाती है। बैंक टीडीएस कटौती वार्षिक आधार पर करता है।  
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।