दैनिक भास्कर हिंदी: पवनकर हत्याकांड: आरोपी ट्रेन में बैठकर दिल्ली के लिए हो गया था रफू-चक्कर,फुटेज खंगालती रही पुलिस

June 26th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बहुचर्चित पवनकर हत्याकांड का आरोपी वारदात को अंजाम देकर ट्रेन से दिल्ली के लिए रफू-चक्कर हो गया और पुलिस रेलवे स्टेशन के फुटेज खंगालती रह गई। 16 जून तक लगातार स्टेशन के कैमरों के फुटेज पुलिस द्वारा खंगालने के बाद भी आरोपी कैमरों की पकड़ में नहीं आया, जबकि सालों से इन कैमरों के हवाले से नागपुर जैसे संवेदनशील शहर की सुरक्षा का दावा किया जाता रहा है। पवनकर हत्याकांड से एक बार फिर विभाग के दावों की पोल खुल गई।

पता चला है कि स्टेशन पर होने वाली सरेआम कई वारदातों का पता करने के लिए जब कैमरों की रिकॉर्डिंग तलाशी गई, तो इसमें कोई सुराग नहीं लग पाया, क्योंकि इसकी गुणवत्ता खराब थी। अब विभाग कह रहा है कि वह नए कैमरे लगाएगा। अब सवाल यह है कि जब इन कैमरों का कोई औचित्य नहीं था, तो विभाग ने इस पर 11 लाख से अधिक खर्च किए उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा।

कई बार खंगाले गए थे फुटेज
पुलिस के अनुसार जब आरोपी ने अपने भागने के बारे में बताया, कि हत्या करने के बाद सुबह के समय वह स्टेशन से ही दिल्ली की ट्रेन पकड़ी, जिसे सुन पुलिस हैरान हो गई थी, क्योकि आरोपी की खोजबीन में पुलिस ने नागपुर स्टेशन पर लगे सभी कैमरों की फुटेज कई बार चेक की थी, लेकिन आखिर तक आरोपी का नामोनिशान नहीं दिखा। हालांकि आरोपी स्टेशन परिसर में पश्चिम या पूर्व द्वार से ही होकर आया है। यहां से ट्रेन पकड़ने के लिए वह प्लेटफार्म पर आया था। प्रवेश द्वार व प्लेटफार्म दोनों संवेदनशील जगह रहने के बाद भी स्टेशन कैमरों के पकड़ में आरोपी के नहीं आने से स्टेशन पर अापराधिक गतिविधियों की स्थिति का अंदाजा लगाना आसान है।

नाममात्र के रह गए हैं स्टेशन पर लगे कैमरे
नागपुर रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता बनाने के लिए यहां वर्ष 2003 में 11 लाख 25 हजार से अधिक खर्च कर 45 कैमरे एसएनटी (सिग्नल एंड टेलीकॉम विभाग) ने लगाए थे। यह कैमरे अत्याधुनिक प्रणाली के नहीं रहने से आज केवल नाममात्र के रह गए हैं। कुछ कैमरे धुंधली तस्वीरें दिखा रहे हैं, वहीं कुछ कैमरों को स्टेशन की संवेदनशील जगहों को छोड़ सामान्य जगह लगाए गए हैं।

परिणाम स्वरूप स्टेशन पर होने वाली अापराधिक गतिविधियों को कैमरे पकड़ नहीं पाते हैं। स्टेशन पर होनेवाली बैग चोरी से लेकर बच्चों के गायब होने आदि की घटनाओं से कैमरा पर्दा उठाने में नाकाम तो रहे हैं, वहीं हाल ही में शहर के एक जघन्य हत्याकांड के आरोपी की मौजूदगी भी नहीं कैद कर पाए हैं। शहर के आराधना नगर में 10 जून की रात आरोपी विवेक पालटकर ने अपने जीजा, बहन समेत 2 मासूम बच्चे व एक वृद्धा की हत्या की थी, जिसके बाद से कुल 10 दिन वह फरार रहा। यह आरोपी अपने मोबाइल के लोकेशन के आधार पर लुधियाना में पकड़ा गया। 



सुरक्षा में लगातार हुई लापरवाही
दो वर्ष पहले स्टेशन पर एक महिला की हत्या होने की घटना हुई थी। 3-4 व 5-6 नंबर के प्लेटफार्म के बीच में पटरी के समीप महिला की लाश पड़ी मिली थी। कई बार CCTV फूटेज खंगालने के बाद इसमें न तो महिला दिखी और न ही यहां रात के वक्त आनेवाला कोई शख्स। इसके बाद परिसर से मासूम बच्चों के गायब होने की घटनाएं हुई हैं, जिसमें संतरा मार्केट की तरफ से गायब मासूम बच्चे का भी सामावेश है। जिसकी बहन पानी लाने गई थी, वापसी के बाद 5 वर्ष का मासूम गायब था, जिसे आज तक ढूंढने में पुलिस असफल रही है। यही नहीं गत 3 वर्ष पहले हुई घटना में स्टेशन के विश्रामालय से एक यात्री कैमरों के सामने से ही टीवी चुरा ले गया, जिसका सुराग आज तक नहीं लग पाया है।

अब अत्याधुनिक नए कैमरे लगेंगे
गत 5 वर्षों से स्टेशन पर अत्याधुनिक कैमरे लगाने की घोषणा की जा रही है, लेकिन अभी तक पूरा नहीं किया गया है। दावा किया गया कि कुल 210 नए कैमरे स्टेशन पर लगाए जाएंगे।  यह घूमने वाले कैमरे होंगे। जिससे कोई घटना कैमरों की नजर से बच नहीं पाएगी। इसके अलावा अब नए सिस्टम में किसी भी अपराधी की फोटो व जानकारी फीड करने पर अगर वह आरोपी परिसर में कैमरों की नजर में आया, तो इसका संकेत रेलवे पुलिस को मिल जएगा और आरोपी पकड़ा जाएगा।

सुरक्षा व्यवस्था होगी चाक-चौबंद
बहुत जल्द स्टेशन पर अत्याधुनिक प्रणाली के कैमरे लगाए जाने वाले हैं, जिसके बाद स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होगी।
(ज्योतिकुमार सतिजा, मंडल सुरक्षा आयुक्त, आरपीएफ मध्य रेलवे नागपुर)

धुंधली तस्वीर के कारण अपराधी नहीं दिखा

अपराधी को ढूंढने के लिए हमने एड़ी-चोटी का जोर लगाया था। विवेक की जानकारी के लिए नागपुर स्टेशन के CCTV फुटेज भी देखे थे। जो काफी धुंधले थे। बारीकी से जांच करने के बाद भी आरोपी पहचान में नहीं आया। स्टेशन के कैमरे ज्यादा खराब हैं, जिसे बदलने की जरूरत है, ताकि भविष्य में होनेवाली घटना में कैमरों की मदद मिल सके।
(नीलेश भरने, डीसीपी, जोन-4 शहर पुलिस)