हजारों लाभार्थियों का था लक्ष्य: प्रधानमंत्री आवास योजना का लोगों को नहीं मिल रहा लाभ

January 8th, 2022

डिजिटल डेस्क, कामठी/कन्हान। किसी भी व्यक्ति के लिए रोटी, कपड़ा और मकान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। कामठी नगर परिषद की ओर से इंदिरा आवास योजना, रमाई आवास योजना आदि द्वारा प्राप्त हितग्राहियों को शासकीय योजना के माध्यम से आवास उपलब्ध कराया गया। वर्ष 2015 में शुरू की गई इस योजना के अनुसार कामठी नगर परिषद में प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू करना प्रारंभ किया। 10 अप्रैल 2017 में इस योजना के तहत 5 हजार परिवार एवं 6 हजार 100 लाभार्थियों ने आवेदन करने का लक्ष्य रखा था। जिनमें से केवल 1800 ने ऑनलाइन आवेदन किया है। नजूल और आखीव पत्रिका धारकों की डीपीआर तीन घटकों में तैयार की गई थी तथा 1077 आवेदन मंजूरी के लिए भेजे गए थे। जिसमें से 688 नजूल धारक तथा 389 अाखीव पत्रिका धारक लाभार्थी हैं। जबकि अन्य लाभार्थी अभी भी स्थायी पट्टे एवं आखीव पत्रिका की कठिनाई के कारण लाभ से वंचित हैं। नतीजतन प्रधानमंत्री आवास योजना खोखली होती दिखाई दे रही है। केंद्र में भाजपा तथा राज्य में महाविकास आघाड़ी सत्ता में है। पिछले 15 वर्षों से कामठी-मौदा विधानसभा क्षेत्र में प्रतिनिधि के रूप में चंद्रशेखर बावनकुले कार्यरत थे। उन्होंने इस योजना में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अनेक अशिक्षित, निराश्रित परिवार को अभी भी स्थायी घर नहीं है और आम आदमी जो एक पीढ़ी से झुग्गी झोपड़ियों में रह रहा है वह अभी भी उपेक्षित है। यह एक त्रासदी है कि, कई लाभार्थियों ने इस उद्देश्य के लिए योजना के तहत आवास के लिए आवेदन किया है, लेकिन आवेदन करने के पांच साल बाद भी उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना का शुभारंभ बड़ी धूमधाम से किया गया था। अनेकों गरीबों की उम्मीदें आवास योजना को लेकर धराशायी हो गई। अनेकों परिवार के हजारों सदस्यों ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया था। घरकुल योजना के लिए लाखों रुपए का भुगतान किया जाना था, लेकिन प्रशासन के अनियोजित कुप्रबंध के कारण इस योजना का भविष्य सवालों के घेरों में है। इसका जिम्मेदार कौन? यह सवाल यहां के जागरुक नागरिक कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कामठी नगर परिषद को राज्य सरकार की ओर से 4 करोड़ 75 लाख 20 हजार रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ है। प्रशासन की अक्षम्य लापरवाही और मनमानी के कारण गरीब लोगों का आवास योजना का सपना अधर में लटक गया है। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री आवास योजना घरेलू लाभार्थियों के लिए सफेद हाथी बनकर रह गई है।