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14 वर्षों से अस्पताल में पड़ी महिला के इलाज के  लिए मिली फ्लैट बेचने की अनुमति

14 वर्षों से अस्पताल में पड़ी महिला के इलाज के  लिए मिली फ्लैट बेचने की अनुमति

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिमागी हालत ठीक न होने के चलते 14 सालों से इलाज करा रही एक महिला के रिश्तेदार (देवर) को उसका एक फ्लैट बेचने की इजाजत दे दी है। साल 2006 में सीने में दर्द की शिकायत के चलते महिला को सैफी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान उसे हार्ट अटैक आया। जिसका उसके मस्तिष्क पर असर पड़ा।तब से वह अस्पताल में भर्ती है। फिलहाल वह अपनी संपत्ति की देख रेख करने में सक्षम नहीं है। उसका इलाज डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है। 

59 वर्षीय महिला के इलाज में एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च हो चुकी है। चूंकि अब इलाज के खर्च के लिए पैसों की कमी महसूस हो रही है। इसलिए उसके रिश्तेदार ने फ्लैट बेचने की इजाजत दिए जाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि महिला के माता-पिता का व पति का निधन हो गया है। महिला पूरी तरह से बिस्तर पर है। उसकी देखरेख के लिए 24 घंटे नर्स व डॉक्टर की जरूरत है। डॉक्टरों ने भी यह प्रमाणित किया है कि महिला की मानसिक हालत ठीक नहीं है। 

याचिकाकर्ता ने याचिका में कहा था कि एक व्यक्ति महिला के कफ परेड स्थित फ्लैट को 19 करोड़ 51लाख में खरीदने की इच्छा जताई है। इसलिए याचिकाकर्ता की महिला के हित में उसका फ्लैट बेचने की इजाजत दी जाए। याचिकाकर्ता अपने 26 लाख रुपए भी महिला के इलाज में खर्च कर चुका है। याचिकाकर्ता ही अब महिला का उत्तराधिकारी है। इससे पहले फ्लैट बेचने के लिए सत्र न्यायालय में आवेदन किया गया था लेकिन सत्र न्यायालय ने कहा था कि उसके पास यह अनुमति देने का अधिकार नहीं है।

न्यायमूर्ति बीपी कुलाबावाला की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका पर गौर करने व महिला के इलाज से जुड़े दस्तावेज पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को महिला का फ्लैट बेचने की इजाजत दे दी। चूंकि इस मामले में जिलाधिकारी के अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ेगी। इसलिए खंडपीठ ने जिलाधिकारी को शीघ्रता से एनओसी के आवेदन पर निर्णय लेने को कहा। खंडपीठ ने घर की बिक्री के बाद याचिकाकर्ता को पूरे मामले की जानकारी प्रोथोनोटरी को देने को कहा। 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।