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24 कैरेट गहनों की बिक्री पर रोक के खिलाफ याचिका, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

24 कैरेट गहनों की बिक्री पर रोक के खिलाफ याचिका, हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने  सोने के गहनो पर बेहद शुद्घ का लेबल (स्टैम्पिग) लगाने  तथा 24 कैरेट के गहनों की बिक्री पर लगाई गई रोक व हॉलमार्क की अनिवार्यता के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार के उपभोक्ता मंत्रालय से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति एस सी गुप्ते व न्यायमूर्ति माधव जामदार की खंडपीठ ने यह जवाब पुणे के ज्वेलर्स संगठन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। 

पुणे सराफ संगठन की ओर से दायर याचिका कहा गया है कि पहले 10 श्रेणियों के गहने होते थे। अब इसे 14,18 व 22 कैरेट की तीन श्रेणियों तक सीमित कर दिया गया है। 24 कैरेट के गहने बेचने पर रोक लगा दी गई है। यह रोक कारोबार के साथ साथ शुद्व गहनों की सांस्कृतिक विरासत व परंपरा को प्रभावित करती है। इसलिए इस संबंध में 15 जनवरी 2020 को केंद्र सरकार की ओर से जारी निर्देश को निरस्त कर दिया जाए। 

याचिका के मुताबिक यह संविधान के अनुच्छेद 19 (1) जी के प्रावधानों के खिलाफ है। जो हर नागरिक को अपना पेशा व कारोबार करने का अधिकार देता है। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा 15 जनवरी 2020 को जारी आदेश के चलते ज्वेलर्स के का यह अधिकार प्रभावित हो रहा है। क्योंकि जून 2021 से सिर्फ 14,18 व 22 कैरेट व आरटीक्राफ्ट पर हालमार्क लगाना अनिवार्य किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले को दंडित करने व एक साल की सजा का भी प्रावधान किया गया है। याचिका के मुताबिक कोरोना के चलते  ब्यूरो ऑफ इंडियन इंडियन स्टैण्डर्ड के पास ज्वेलर्स के पास पंजीयन के लिए एक साल का समय दिया गया है। 

24 कैरेट में ही बनवाते हैं अंगूठी

याचिका के मुताबिक लोग अगूंठी अक्सर 24 व 23.5 कैरेट की मांग करते है। इस तरह के गहनों से लोग शुद्ध सोने का संग्रह करते है। इसलिए ज्वेलर्स को गहनों में उच्च शुद्धता का लेवल लगाने की इजाजत व 24 कैरेट के गहने बेचने की इजाजत दी जाए।  याचिका पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने  केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले से जुड़े विभाग को याचिका पर जवाब देने को कहा और मामले की सुनवाई 15 दिसंबर 2020 तक के लिए स्थगित कर दी
 

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