कामठी: बांटे गए बागान के पट्‌टे, अब हुए व्यावसायिक

February 27th, 2022

डिजिटल डेस्क, कामठी/कन्हान। ब्रिटिशकाल में पूरी कामठी अंग्रेजों के कब्जे में थी। सन् 1821 में कैन्टोनमेंट बोर्ड का गठन किया। सन् 1927 में कैन्टोनमेंट बोर्ड ने कामठी को अलग कर नप का गठन किया गया। उस समय नप ने अपनी खाली पड़ी कई एकड़ जमीनों को किसानों को खेती और बागानी के लिए 27 लोगों को लीज पर कई एकड़ जमीन दी थी। जिन्हें यह जगह लीज पर दी गई थी, उनके वारिसदारों ने इस जगह को व्यावसायिक रूप में तब्दील कर दिया। नप ने 20 लोगोंे की लीज खत्म कर दी और जिसके अपने कब्जे में लेने के लिए नप प्रशासन जिलाधिकारी को इन लीज धारकों द्वारा खाली कराकर इन्हें अन्य शासकीय उपयोग में लाने हेतु आदेश प्राप्त किया। 12 फरवरी से प्रशासक के रूप में मौदा के उपविभागीय अधिकारी श्याम मदनूरकर ने पदभार संभालते ही खत्म लीज धारकों से जगह कब्जे में लेने का मुख्याधिकारी संदीप बोरकर को आदेश दिया। मुख्याधिकारी अपने दल के साथ पुलिस को लेकर इन लीजधारक बागान मालिकों से कब्जे में लेने का प्रयास किया। लेकिन लीज समाप्त होने वाली के वारिसदारों द्वारा दादागीरी दिखाकर नप प्रशासन को बैरंग लौटने पर मजबूर कर दिया। जिसकी पूरी रिपोर्ट मुख्याधिकारी ने प्रशासकीय अधिकारी मदनूरकर को दी। मदनूरकर ने यह जानकारी जिलाधिकारी विमला आर. को दी। हालांकि, उनके कुछ वारिस अभी भी किराए के बगीचे की जगह पर खेती कर रहे हैं, यह मानते हुए कि यह उनकी पुश्तैनी जमीन है। जबकि कुछ ने खेती करना बंद अपनी भूमि बंजर दिखा रहे हैं। बागानों का उपयोग अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। कुछ बागानों की जगह विलुप्त हो चुकी है तो कुछ आवासीय क्षेत्र में बदल गए है। कुछ बागानों के पट्टे दो साल पहले समाप्त हो चुके हैं और उनका नवीनीकरण नहीं किया गया है। ऐसे में यदि सरकारी कार्य के लिए पट्टे पर स्थान की आवश्यकता हो तो उसी जमीन पर कब्जा करने के लिए प्रशासन को खुद लीज होल्डर के सामने रेट चुकाना पड़ता है ऐसे में ये पट्टाधारक खुद को गार्डन स्पेस का मालिक मानकर मोटे लोगों की भूमिका निभा रहे हैं। ऐसी ही एक घटना शनिवार की दोपहर करीब 12 बजे हुई। जब तहसील, नगर परिषद, भूमि अभिलेख प्रशासनिक अधिकारी पुलिस दल के साथ रानी तलाब मोक्षधाम के पास एक बगीचे की जगह की गणना करने गए। तथ्य यह है कि भूमि पट्टे पर दी गई है इसका मतलब यह नहीं है कि भूमि का स्वामित्व है, क्योंकि भूमि पट्टे पर है। उनके अनुसार, सरकार किसी भी समय पट्टे पर ली गई भूमि का कब्जा ले सकती है। यदि इसका उपयोग सरकारी उद्देश्यों के लिए किया जाता है। कामठी शहर में बागीचा प्रयोजनार्थ जगह वितरित किए गए 27 लोगों में काटी ओली, कोलसाटाल, भाजीमंडी, दाल ओली, अाजनी, छावणी, जुनी खलाशी लाईन, दुर्गा चौक, आजनी इतवारी, गुजरी बाजार, लाला ओली, मोदी पडाव, जूनी भाजीमंडी, संजय नगर निवासी नागरिकाें का समावेश है। जिसमें से 20 से अधिक नागरिकोंे की लीज खत्म हो चुकी है। साथ ही, इनमें से कई नागरिकों के बागीचे विलुप्त हो गए हैं और बागानों की जगह का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।