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पीएम आवास में भारी गोलमाल : फर्श न प्लास्टर, आवासों में खिड़की-दरवाजे तक नहीं

पीएम आवास में भारी गोलमाल : फर्श न प्लास्टर, आवासों में खिड़की-दरवाजे तक नहीं

डिजिटल डेस्क, शहडोल। जिले में पीएम आवास योजना के तहत बने अधिकतर मकान रहने लायक नहीं है। लक्ष्य पूरा करने की होड़ में अधूरे मकानों को कागजों में पूरा दिखा दिया गया है, जबकि मकानों में अंदर प्लास्टर नहीं है और फर्श भी नहीं बनी है। अधिकतर मकानों में तो दरवाजे भी नहीं लगे हैं।

कोई भी आवास पूर्ण नहीं है

पीएम आवासों की पड़ताल करने भास्कर सोहागपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जुगवारी और बंधवाबड़ा पहुंचा तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। यहां 2016-17 में बने आवासों का इस्तेमाल या तो गौशाला के लिए किया जा रहा है, या फिर घर का टूटा-फूटा सामान रखने के लिए, क्योंकि कोई भी आवास पूर्ण नहीं है। अंदर की दीवारों में प्लास्टर नहीं है। फर्श नहीं बनी है। दरवाजे-खिड़कियां नहीं हैं। कुछ में तो बीच की दीवार भी गायब है। कागजों में ये सभी आवास पूर्ण हैं। आवास निर्माण के लक्ष्य को पूरा करने की जल्दबाजी में मजदूरी का पंद्रह हजार रुपए भुगतान किए बिना ही योजना को क्लोज कर दिया गया। कुछ इसी तरह की स्थिति जिले भर में बनाए गए पीएम आवासों की है। 

बाहर की दीवार पर प्लास्टर 

जुगवारी निवासी राम निवास कोल (आईडी-2383318) का 2016-17 में पीएम आवास बना है। कागजों में तो आवास पूर्ण हो चुका है, लेकिन हकीकत यह है कि सिर्फ घर की दीवार ही खड़ी हुई है। घर में दरवाजे और खिड़कियां नहीं लगी हैं। अंदर प्लास्टर भी नहीं है और फर्श भी नहीं बनी है। आनन-फानन में घर के बाहर प्लास्टर कराके सफेद सीमेंट पुतवार फोटो खींच ली गई और आवास पूर्ण दिखा दिया गया। योजना के तहत तीन किश्तों में 1 लाख 30 हजार का भुगतान हुआ है। 

घर में बीच की दीवार ही नहीं 

ग्राम पंचायत जुगवारी में ही 2016-17 में मन्नू बाई कोल (आईडी-2349574) के नाम से भी पीएम आवास बना है। यह मकान भी रहने लायक नहीं है। एक कमरे में दरवाजा लगा है, लेकिन दूसरे कमरे में दरवाजा नहीं है। दूसरे कमरे की एक दीवार भी नहीं बनी है। हितग्राही घर का इस्तेमाल कपड़े सुखाने और सामान रखने के लिए करते हैं। योजना के तहत इसको भी एक लाख 30 हजार रुपए का भुगतान कर दिया गया है, लेकिन मकान को देखे बिना ही इसे पूर्ण दिखा दिया गया है। 

मर्यादा अभियान का दरवाजा

ग्राम पंचायत बंधवाबड़ा में आदिवासी मोहल्ले में भोली कोल का 2017-18 में पीएम आवास स्वीकृत हुआ था। कागजों में यह भी पूरा हो गया है, लेकिन घर के अंदर न तो फर्श बनी है और न ही दीवारों में प्लास्टर किया गया है। यहां दरवाजा भी मर्यादा अभियान के तहत बने शौचालय का लगा हुआ है। परिजनों ने बताया कि वे यहां नहीं रहते हैं। इसका इस्तेमाल सामान रखने के लिए किया जाता है। यहां बने अन्य पीएम आवासों की भी यही स्थिति है। कोई भी मकान रहने लायक नहीं है। 
 

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