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35 साल पहले खड़े किए पोल, आज तक नहीं पहुंची बिजली

35 साल पहले खड़े किए पोल, आज तक नहीं पहुंची बिजली

आज भी अंधेरे में रहने को मजबूर है 32 परिवार, मामला जुन्नारदेव के छातीआम गांव का
डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा ।
जिले के आदिवासी अंचल में आज भी ऐसे गांव मौजूद हैं जो विकास के दावों से कोसों दूर हैं। कहने को शासन-प्रशासन यहां मूलभूत सुविधाओं के विस्तार का दावा तो करता है, लेकिन आज के युग में भी ये लोग चिमनी की रोशनी में अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। ताजा मामला जुन्नारदेव विकासखंड की ग्राम पंचायत आलमोद का है। इस ग्राम पंचायत के तहत आने वाले गांव छातीआम में 35 साल पहले शासन ने बिजली के पोल गड़वाए, ताकि यहां के लोगों की भी जीवन शैली में सुधार हो सके, लेकिन  पोल लगाने के बाद अधिकारियों ने यहां दोबारा झांक कर भी नहीं देखा। अब लंबा समय गुजर जाने के बाद भी यहां के लोग आज भी बिजली आने का इंतजार कर रहे हैं। जबकि यहां एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 32 परिवार निवास करते हैं। बताया जा रहा है कि बफर जोन में आने के बाद इन गांव वालों को यहां से शिफ्ट किए जाने के भी प्रयास किए गए, लेकिन उसके बाद भी ये लोग यहां जाने को तैयार नहीं हैं। 
झिरिया के पानी से कर रहे गुजारा 
स्थानीय गांव वालों ने बताया कि यहां पानी के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं हैं। गर्मियों की दस्तक के साथ ही यहां पीने के पानी की दयनीय स्थिति हो जाती है। आज भी यहां के लोग झिरिया का पानी पीने को मजबूर हैं। वह भी काफी दूर से लाना पड़ता है।
समस्या क्या... 
आदिवासी अंचलों में कई गांव ऐसे हैं जो छोटे-छोटे टोलों में बंटे हुए हैं। ऐसे गांवों की संख्या जिले में सैकड़ों में है। इन गांवों में बिजली व्यवस्था के लिए  राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत पोल तो लगाए गए हैं, लेकिन आज तक बिजली नहीं पहुंचाई जा सकी। कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इसका कोई ठोस हल नहीं निकल पाता है।
इनका कहना है.... 
यदि ऐसी स्थिति है तो इसका परीक्षण करवाते हुए गांव में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि गांववासियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो सके। 
-सुनील उईके विधायक, जुन्नारदेव 
जिले मैं अभी हाल ही में आया हूं। मुझे मामले की जानकारी नहीं है। यह किस योजना के तहत खंभे लगाए गए थे तथा वहां बिजली किस कारण से अब तक नहीं पहुंच सकी है। इसकी जांच की जाएगी।
-एसआर येमदे, अधीक्षण यंत्री
 

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