दैनिक भास्कर हिंदी: गर्भवती महिला को नहीं मिली 108 एंबुलेंस, सड़क पर हुए बच्चे की मौत

December 24th, 2017

डिजिटल डेस्क, छिंदवाड़ा। शनिवार की शाम समय पर गर्भवती महिला को 108 वाहन की सुविधा न मिलने से सड़क पर प्रसव हो गया। इस दौरान प्रसूता तो बच गई लेकिन नवजात शिशु को नहीं बचाया जा सका। मामला ग्राम मेघासिवनी का है जहां से महज दो किलोमीटर दूर ग्राम छावड़ी निवासी 28 वर्षीय गीता पति राजेश को प्रसव पूर्व पीड़ा होने पर जिला अस्पताल लाना था लेकिन बार बार फोन लगाने के बाद भी समय पर 108 वाहन न पहुंचने से महिला को दो पहिया वाहन में मेघासिवनी तक लेकर परिजन आ गए। मेघासिवनी पहुंचने पर प्रसूता को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी तथा सड़क किनारे ही उसने एक बच्चें को जन्म दे दिया। घटना शाम 7 बजकर 10 मिनिट की बताई जा रही है। गर्भवती का प्रसव सड़क पर होने के बाद  पहुंची 108 वाहन में उसे जिला अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने नवजात शिशु को मृत घोषित कर दिया। वहीं महिला को उपचार के लिए गायनिक वार्ड में भर्ती कराया गया है।

समय पर मिलता साधन तो बच जाती जान
गर्भवती को घर से दो पहिया वाहन में लेकर निकले परिजनों को नहीं मालूम था कि रास्ते में उन्हें ऐसी स्थिति से सामना करना पड़ेगा। राजेश ने बताया कि एक घंटे तक साधन नहीं मिलने एवं पहले 108 में फोन न लगने से परेशानी हो गई। जब वाहन का फोन लगा तो वह समय पर नहीं आ सका। समय पर वाहन मिल जाता तो शायद नवजात की जान बचाई जा सकती थी।

महिला की हालात भी नाजुक
पहली बार प्रसव पीड़ा को सहन करने वाली गीता की हालात भी नाजूक बताई जा रही है। अधिक रक्तस्त्राव हो जाने के कारण प्रसूता की स्थिति नाजूक बताई गई है जिसका तीन घंटे तक ऑपरेशन थेयटर में उपचार चलता रहा।

सिकलसेल से पीडि़त बच्चे ने तोड़ा दम
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में बीते दो दिनों से खून की कमी से जूझ रहे दो वर्षीय माशूम आशीष की मौत हो गई। जिले के पांढुर्णा विकासखंड के ग्रामीण अंचल से आए सुरेश ने बताया कि उसके दो वर्षीय मासूम बालक को सिकलसेल की बीमारी थी जिसके चलते उसे खून की कमी हो रही थी। जिला अस्पताल लाने से पूर्व उसे बहुत कमजोरी आ गई थी तथा डॉक्टरों के अनुसार बच्चें के शरीर में तीन ग्राम खून ही शेष था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बच्चें को खून तो उपलब्ध करा दिया गया था लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।