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नागपुर एयरपोर्ट के निजीकरण पर मंत्रालय की नहीं मिली हरी झंडी, जीएमआर और एमआईएल पर आपत्ति

नागपुर एयरपोर्ट के निजीकरण पर मंत्रालय की नहीं मिली हरी झंडी, जीएमआर और एमआईएल पर आपत्ति

डिजिटल डेस्क, नागपुर। डॉ. बाबासाहब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय विमानतल के निजीकरण के लिए जीएमआर एयरपोर्ट्स लिमिटेड सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी है। विमानतल के निजीकरण के लिए महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी (एमएडीसी) ने जीएमआर को 85 फीसदी और एमआईएल को 15 फीसदी हिस्सेदारी का प्रस्ताव बनाकर भेजा है, जिससे केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय असंतुष्ट है और आपत्ति दर्ज करवाई है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी (एमएडीसी) एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में मिहान इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) को बनाया है। 

बना चर्चा का विषय
विशेष बात यह है कि सरकार को वर्तमान में मिलने वाला राजस्व और निजीकरण के बाद मिलने वाले राजस्व में काफी अंतर है। चर्चा चल रही है कि वर्तमान में जो राजस्व मिल रहा है वह तीन गुना अधिक है, जबकि निजीकरण में वह कम होने वाला है। 

दिए सुधारने के निर्देश
 सूत्रों का कहना है कि एमएडीसी ने निजीकरण में हिस्सेदारी के लिए जो प्रस्ताव बनाकर भेजा है, उसमें एमआईएल को 14.49 फीसदी हिस्सेदारी दी गई है, जबकि जीएमआर को शेष 85.51 फीसदी हिस्सेदारी दी गई है। इस पर आपत्ति दर्ज करवाते हुए नागर विमानन मंत्रालय ने जवाब-तलब किया है कि यदि सारी हिस्सेदारी निजीकरण वाली कंपनी को दे दी जाएगी, तो सरकार को राजस्व में क्या मिलेगा? प्रस्ताव में संशोधन के िलए भी निर्देशित किया गया है।

तर्क : यात्री ज्यादा, तो हिस्सा भी ज्यादा
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि देश की राजधानी स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय विमानतल, नई दिल्ली में एएआई की हिस्सेदारी 26 फीसदी है, जबकि जीएमआर की 54 फीसदी और फ्रापोर्ट एजी और ऐरामैन मलेशिया की 10-10 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय विमानतल हैदराबाद में एएआई और तेलंगाना सरकार की 13-13 फीसदी कुल 26 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं जीएमआर की 63 फीसदी और 11 फीसदी मलेशिया एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स की हिस्सेदारी है। मामले को लेकर तर्क दिया जा रहा है कि नई दिल्ली और हैदराबाद विमानतल पर यात्रियों की संख्या अधिक है इस वजह से सरकार को अधिक हिस्सेदारी दी गई। हालांकि नागपुर विमानतल विकसित होने के बाद यात्रियों की संख्या यहां भी बढ़ना तय है।

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