दैनिक भास्कर हिंदी: बांसुरी श्रीकृष्ण का वाद्य है और प्रकृति से जुड़ा हुआ है, इसे स्वयं भगवान ने बनाया : पं. हरिप्रसाद

August 25th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण का वाद्य है और ये प्रकृति से जुड़ा हुआ है। बांसुरी की ध्वनि श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। यह फैक्टरी में नहीं बनती है इसकी अलग गरिमा और महिमा है। इसे स्वयं भगवान ने बनाया है। ये कहना है पद्म भूषण, पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित हरिप्रसाद चौरसिया का। पंडित हरिप्रसाद चौरसिया की बांसुरी की धुन ने शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाने अहम भूमिका निभाई है। भारतीय बांसुरी वादन कला को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में पंडित हरिप्रसाद चौरसिया की भूमिका प्रशंसनीय है। उनका मानना है कि बांसुरी प्रेम के साथ सृजन का प्रतीक है। उन्होंने चांदनी, डर, लम्हें, सिलसिला, फासले, विजय और साहिबा जैसी फिल्मों में भी अपना संगीत दिया है।

उपराजधानी में आए पंडित हरिप्रसाद ने कहा कि दरअसल हम संगीत को मनोरंजन के रूप में देखते हैं भक्ति के रूप में नहीं, ये बात बदलनी चाहिए। यदि संगीत को भी विषय के रूप में पढ़ाया जाए, तो युवा पीढ़ी भी इससे जुड़ेगी सरकार शास्त्रीय संगीत और परंपराओं को बचाने में योगदान करना चाहिए। पंडितजी ने कहा कि सरकार इस संबंध में कुछ नहीं कर रही है। वे शुक्रवार को एचसीएल कंसर्ट में शिकरत कर रहे थे। पंडित हरिप्रसाद चौरसिया व राकेश चौरसिया बांसुरी की जुगलबंदी प्रस्तुत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि संगीत से आध्यमिकता का अहम रोल है। उन्होंने कहा संगीत व आध्यात्म वैसे ही हैं जैसे खाना बनाना और खाना। 80 वर्ष के हो चुके पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने कहा कि उनकी शक्ति और एनर्जी का सोर्स संगीत ही है। 

संगीत का जादू है
फिल्मों में संगीत के बारे में उन्होंने कहा कि परिवर्तन जरूरी है, नए प्रयोग भी आवश्यक हैं, अंधेरा होने बाद जब उजाला होता है तो ज्यादा अच्छा लगता है। वहीं उन्होंने बांसुरी के बारे में कहा कि श्राेता बांसुरी सुनकर अलग-अलग अनुभव करता है। कोई खुश होता है तो कोई राेने लगता है, कोई विस्मृत हो जाता है यही संगीत का जादू है। उन्होंने कहा कि बांसुरी जल्दी असर करती है, भले ही हमारे यहां के लोग विश्वास करें न करें परंतु विदेशों में लोग इस बात पर भरोसा करते हैं।  

वातावरण को बनाया सुरमई 
पंडित हरिप्रसाद चौरसिया व राकेश चौरसिया दोनों ने बांबू से बना कुर्ता पहना। इस बारे में पंडित जी ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं था कि बांस से कुर्ता बनता है, इसे पहनकर बहुत ही अच्छा लग रहा है। पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने जैसे ही बांसुरी में सुर घोले तो पूरा वातावरण सुरमई हो गया। सभी मधुर एवं आत्मीय बांसुरी वादन में खो गए। पंडितजी व राकेश चौरसिया ने बांसुरी वादन तेज कर दिया। सबकुछ शांत, पर चहुंओर उल्लास की अनुभूति। विश्व विख्यात बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया का श्रोता बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उनके मंच पर दस्तक देते ही श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका जोरदार स्वागत किया। रसिकजन मंत्रमुग्ध हो गए। बांसुरी से बरसते सुरों में पखावज की तान ने भी श्रोताओं को अपनी जगह से हटने नहीं दिया।