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पीएमसी बैंक को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका, निकासी पर पाबंदी हटाने की मांग, ईओडब्लू ने भी दर्ज की एफआईआर 

पीएमसी बैंक को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका, निकासी पर पाबंदी हटाने की मांग, ईओडब्लू ने भी दर्ज की एफआईआर 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। पंजाब एंड महाराष्ट्र को-आपरेटिव बैंक (पीएमसी) में हुई गड़बड़ी के मद्देनजर बैंक खातों से निकासी पर लगाई गई पाबंदी के खिलाफ बांबे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका कंज्यूमर एक्शन नेटवर्क नामक गैर सरकारी संस्था व पीएमसी के खाताधारको ने दायर की है। याचिका में रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा खाते से पैसे निकालने को लेकर लगाई गई पाबंदी को मनमानीपूर्ण व अतार्किक बताया गया है। आरबीआई ने 23 सितंबर व 26 सितंबर को निर्देश जारी कर पीएमसी के खाते से पैसे निकालने की सीमा तय की थी। पहले जारी किए गए निर्देश में एक हजार रुपए निकलाने की इजाजत दी गई थी जबकि इसके बाद जारी किए गए निर्देश में 10 हजार रुपए निकालने की अनुमति दी गई थी। याचिका में आरबीआई के इस निर्देश को रद्द करने की मांग की गई है। पैसे निकालने के संदर्भ में तय की गई सीमा को लेकर कोई कारण नहीं बताया गया है। पैसे निकालने की सीमा तय किए जाने से खाताधारकों का नुकसान होगा। इसलिए इसे रद्द किया जाए। इसके साथ ही केंद्र सकार व आरबीआई को ऐसे नियम बनाने का निर्देश दिया जाए ताकी पीएमसी बैंक जैसी गड़बड़ी दोबारा न घटित हो। 

पीएमसी बैंक घोटाला मामले में ईओडब्लू ने दर्ज की एफआईआर

पंजाब व महाराष्ट्र कोआपरेटिव बैंक (पीएमसी) घोटाला मामले में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एफआईआर दर्ज कर ली है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रशासक के निर्देशों के मुताबिक जसबीर सिंह मठ्ठा द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू ने पीएमसी बैंक और हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिडेट (एचडीआईएल) के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। बता दें कि पीएमसी बैंक पर आरबीआई ने छह महीने का प्रतिबंध लगा दिया है और खाताधारकों को सिर्फ 10 हजार रुपए निकालने की छूट दी गई है। मामले में पूर्व भाजपा सांसद किरीट सोमैया और कुछ खाताधारकों ने भी पुलिस से शिकायत की थी। पीएमसी बैंक तत्कालीन व्यवस्थापकीय संचालक जॉय थॉमस, चेयरमैन वरियम सिंह समेत बैंक के दूसरे पदाधिकारियों और एचडीआईएल के संचालक वाधवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि साल 2008 से 2019 के बीच कर्ज की रकम वापस न मिलने और एनपीए होने के बावजूद इसे एनपीए नहीं घोषित किया गया और आरबीआई के पास भी फर्जी दस्तावेज जमा कर जानकारी छिपाई गई। इसके चलते बैंक को 4355.46 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। आरोप है कि एचडीआईएल और पीएमसी बैंक के पदाधिकारियों ने मिलकर घोटाला किया और लोगों की जमापूंजी से व्यक्तिगत लाभ हासिल किया। ईओडब्लू ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 465, 466, 471 और 120 (बी) के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले की छानबीन ने लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। 

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