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पीओपी मूर्तियों पर लगाएं स्थायी बैन, हाईकोर्ट के आदेश

पीओपी मूर्तियों पर लगाएं स्थायी बैन, हाईकोर्ट के आदेश

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  लंबे समय से पीओपी मूर्तियों पर बंदी लगाने की मांग की जा रही थी। आखिरकार,   मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने राज्य सरकार को पीओपी मूर्तियों को स्थायी बंदी लगाने का आदेश दिया। खंडपीठ ने कहा कि उत्सव के दौरान देवी-देवताओं की पीओपी मूर्ति बाजार में बेचने के लिए आती है। ऐसी मूर्तियों पर स्थायी बंदी लगाई जाए। 

खामगांव में पांच साल पहले पीओपी मूर्तियों को योग्य तरीके से ठिकाने नहीं लगाने से स्थानीय नगरपरिषद के मुख्य अधिकारी और नगर परिषद के अध्यक्ष के विरोध में ओमप्रकाश गुप्ता ने शिकायत की थी। उसका संज्ञान लेते हुए पुलिस ने मुख्य अधिकारी धोंडिबा नामवाड व अन्य के विरुद्ध अपराध दाखिल किया था। विधानसभा में भी यह मुद्दा गर्माया था। राज्य सरकार ने मुख्य अधिकारी को निलंबित किया था। इसके अलावा फौजदारी मामला भी दाखिल किया गया था। इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताते हुए मामला रद्द करने की विनती करने वाली याचिका नामवाड ने 2010 में दाखिल की थी। उस समय न्या. भूषण गवई की खंडपीठ ने फौजदारी कार्रवाई रद्द की थी। निलंबन को भी स्थगिती दी थी। लगभग 6 साल बाद गुरुवार को याचिका पर अंतिम सुनवाई हुई।

न्या. सुनील शुक्रे और न्या. जामदार की खंडपीठ के सामने सुनवाई हुई। नामवाड पर हुई कार्रवाई पर न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त की। इस तरह कार्रवाई होगी तो अधिकारी कैसे काम करेंगे, यह मुद्दा उपस्थित किया गया। राज्य में ऐसी पीओपी मूर्तियों को अनुमति ही कैसे दी जाती है, यह प्रश्न न्यायालय ने उपस्थित कर पीओपी मूर्ति तैयार करने पर ही बंदी लगाए और मूर्ति तैयार करने पर दंडात्मक कार्रवाई करने के आदेश दिए। पीओपी मूर्ति को योग्य तरीके से ठिकाने लगाने के लिए राज्य की प्रत्येक महानगरपालिका, नगरपरिषद व जिला परिषद को योजना तैयार करने के भी आदेश दिए।
 

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