दैनिक भास्कर हिंदी: रेलवे के पायलट प्रोजेक्ट में नागपुर-बडनेरा शामिल, तैयार होगा मॉडर्न ट्रेन कंट्रोल सिस्टम

June 18th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। भारतीय रेल ने देश के चार रेल सेक्शन को चुन कर एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट में चारों सेक्शन में सिग्नल प्रणाली का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इन चार सेक्शन में मध्य रेेलवे के नागपुर-बडनेरा सेक्शन भी शामिल है। इन सेक्शन का चुनाव सबसे व्यस्त और बड़ी संख्या में ट्रेनाें के आवागमन के कारण हुआ है। नागपुर सेक्शन मध्य भारत में स्थित है, यहां सभी दिशाओं से ट्रेनें आवागमन करती हैं। पायलट प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 1609 करोड़ है। सफल होने के बाद प्रोजेक्ट को सभी जगह शुरू किया जाएगा। जहां भी आवश्यकता होगी वहां इलेक्ट्राॅनिक इंटरलॉकिंग (इनडोर सिस्टम) भी लागू किया जाएगा। दूसरी भाषा में यह मार्डन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम है।  प्रोजेक्ट के लिए रेलटेल कंपनी के साथ एमओयू साइन किया गया है। रेलवे बोर्ड के प्रदीप एम.सिकदर, रेलटेल के निदेशक ए. के.सबलानिया तथा रेलवे बोर्ड के सदस्य एन. काशीनाथ और रेलटेल के सीएमडी पुनीत चावला इस अवसर पर उपस्थित थे।  

24 महीने में होगा पूरा

पायलट प्रोजेक्ट की लागत 1608 करोड़ है। इसे 24 महीने मंे पूरा करना है। इस प्रणाली के अंतर्गत ट्रेन रनिंग स्टॉफ, ड्राइवर्स, गार्ड्स के बीच संचार के लिए मोबाइल ट्रेन रेडियो कम्युनिकेशन सिस्टम और नियंत्रण कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। शुरुआत में इस प्रणाली का उपयोग 500 लोकोमोटिव पर क्रियान्वित किया जाएगा। 

इसलिए जरूरी  

यह सबसे व्यस्त रेलमार्ग हैं। स्वचलित सुरक्षा प्रणाली में सुधार के साथ ही इन रेलमार्गों पर ट्रेनों के अधिक दबाव को कम किया जा सकेगा। रेलमार्ग  की क्षमता को बढ़ाने के साथ ट्रेनों का परिचालन भी व्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा। ट्रेनों की औसत गति को भी बढ़ाने मंे सहायता मिलेगी। लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन (एलटीई) आधारित एमटीआरसी पर आधारित आधुनिक ट्रेन नियंत्रण प्रणाली भारतीय रेलवे की सबसे महत्वाकांक्षी आधुनिकीकरण परियोजनाओं में से एक है। यह विश्व मानकों के अनुरूप सिग्नलिंग प्रणाली के उन्नयन की परिकल्पना करती है।

अहम फायदा : रेल लाइन की क्षमता मजबूत होगी

रेलवे बोर्ड के सिग्नल और टेलीकॉम सदस्य काशीनाथ ने कहा कि हमें रेल नियंत्रण प्रणाली को आधुनिक करने की आवश्यकता है। मॉडर्न सिग्नलाइजेशन और कम्युनिकेशन सिस्टम पूरे विश्व में उपयोग किया जा रहा है। इससे यात्रियों की सुरक्षा और रेल लाइन की क्षमता बढ़ाकर ट्रैक पर और ट्रेनें चला सकते हैं। 

ब्लूप्रिंंट तैयार 

हमने इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। तकनीक, इंटरफेस और अंतर के संबंध मंे हमने औद्योगिक प्रतिनिधि से भी फीडबैक लिया है। -पुनीत चावला, सीएमडी, रेलटेल

सफल होने पर दूसरी जगह भी करेंगे शुरू

प्रोजेक्ट के लिए रेलटेल कंपनी के साथ एमओयू साइन कर लिया है। यह पायलट प्रोजेक्ट है, इसके सफल हाेते ही अन्य ऐसे रेल मार्ग और सेक्शन में भी इसे लागू किया जाएगा , जहां ट्रेनों की संख्या अधिक हो और यातायात व्यस्त और कंजस्टेड हो।  -सुनील उदासी, जनसंपर्क अधिकारी, सेंट्रल रेलवे मुंबई
 

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