comScore

मंदिर मामले पर न्यायालय के निर्णय का इंतजार, नवंबर में आएएसएस की संगठनात्मक गतिविधियां नहीं

मंदिर मामले पर न्यायालय के निर्णय का इंतजार, नवंबर में आएएसएस की संगठनात्मक गतिविधियां नहीं

डिजिटल डेस्क, नागपुर। अयोध्या में मंदिर मामले को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सचेत है। संघ को लगता है कि उच्चतम न्यायालय का निर्णय उनकी उम्मीद के अनुरुप ही आएगा। केंद्र व उत्तरप्रदेश सरकार को इस निर्णय के बाद कुछ न्यायिक कदम उठाना पड़ सकता है। इस बीच सामाजिक भावना भड़काने का प्रयास भी हो सकता है। संभावित स्थिति का अनुमान लगाते हुए संघ नहीं चाहता है कि उसपर किसी तरह का आरोप लगे। इसलिए संघ की ओर से नवंबर में आयोजित बड़े कार्यक्रमाें को रद्द कर दिया गया है। यहां तक कि प्रचारकों से भी कहा किया गया है कि वे संगठनात्मक गतिविधियों पर विराम लगाए रखें।

संघ से जुड़े एक पदाधिकारी के अनुसार उत्तरप्रदेश में संघ कार्यकर्ताओं को सबसे अधिक सचेत रहने को कहा गया है। नवंबर में अयोध्या मंदिर मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय का निर्णय आनेवाला है। संभावित स्थिति को देखते हुए संघ ने लखनऊ में 17 नवंबर से प्रस्तावित एकल कुंभ, अयोध्या में 4 नवंबर से आयोजित दुर्गावाहिनकी के शिविर व उत्तरप्रदेश में विश्व हिंदू परिषद के त्रिशूल दीक्षा कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है। हरिद्वार में होनेवाली संघ की बैठक को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया है। गुरुवार से बैठक आरंभ भी हो गई है। संघ पदाधिकारी के अनुसार 36 संगठनों की गतिविधियां रोककर केवल यही प्रयास किया जा रहा है कि समाज में शांति बनी रहे।

किसी भी तरह की अफवाह या निराधार खबरों को बढ़ावा न मिले। संघ को विश्वास है कि इस बार यह विवाद दूर हो जाएगा। उम्मीद के अनुरुप उच्चतम न्यायालय का निर्णय आने की संभावना है। इसलिए संघ की ओर से आव्हान किया जाने लगा है कि न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना होगा। यह भी हो सकता है कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद केंद्र व उत्तरप्रदेश सरकार को नए कानून बनाने पड़ सकते हैं। उस स्थिति में सामाजिक सहयोग का अधिक महत्व रहेगा। संघ मामलों के जानकार दिलीप देवधर के अनुसार संघ ने सजगता बरतते हुए अपने कार्यक्रमों को रद्द किया है।

स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि समाज में भाईचारा बनाए रखने के सामूहिक प्रयास को और अधिक मजबूती दे। यह भी तय माना जा सकता है कि संघ को उच्चतम न्यायलय के निर्णय की स्थिति के बारे में कुछ संकेत मिले हैं।

कमेंट करें
ZRiIt
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।