दैनिक भास्कर हिंदी: VIP नंबर से RTO ने कमाये 2 साल में ढाई करोड़

May 20th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। लकी नंबर कहें  या अंधश्रध्दा, लेकिन आज भी लोग अपने पसंद के नंबर की मांग आरटीओ कार्यालय में कर रहे हैं। इसके लिए लाखों रुपए तक देते हैं। आंकड़ों की बात करें तो गत 2 साल में शहर आरटीओ को VIP  नंबर बांटकर ही ढाई करोड़ रुपए से ज्यादा राजस्व प्राप्त हुआ है। करीब 3 हजार लोगों ने VIP नंबर की मांग की है। लगभग सभी को VIP  नंबर दिए गए हैं, लेकिन इसके लिए इन मोटी रकम चुकाना जरूरी है।

उल्लेखनीय है कि नागपुर शहर में दिन ब दिन वाहनों की संख्या बढ़ते जा रही है। शहर व पूर्व आरटीओ अंतर्गत वाहनों की बात करें तो शहर में 15 लाख वाहनों की संख्या दर्ज है। हर वाहन की अलग पहचान के लिए इसे नंबर दिया जाता है। जिसमें पहले स्टेट की आईडेंटिफिकेशन रहती है। फिर सीरीज के दो अक्षर होते हैं। इसके बाद लिखा जाता है, नंबर। यह नंबर आरटीओ में होनेवाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन के साथ आगे बढ़ते जाते हैं, लेकिन कई बार कुछ वाहनधारक अपने वाहनों पर वीआईपी यानी स्पेशल नंबर की मांग करते हैं। इसमें कई बार लकी नंबर की सोच होती है, या कई बार पुरानी गाड़ी का नंबर वाहनों पर रिपीट लिखवाना होता है।

इसके अलावा हटकर देखने के लिए भी कई वाहनधारक अपने वाहनों पर अलग नंबर की मांग करते हैं। इनमें अधिकांश नंबर 007, 9999, 5252, 1234, 2111, 4141, 3333, 0000 आदि तरह के होते हैं। लेकिन वाहनधारकों को यह नंबर तभी मिलते हैं, जब वे इसके लिए अलग राशि देते हैं। राशि भी नंबर देख के देनी पड़ती है। वर्तमान नंबर से जितने ज्यादा नंबर आगे का मांगा जाएगा, उस नंबर का दाम उतना ही बढ़ता है। ऐसे में कई बार वाहनधारक इसके लिए एक लाख रुपए तक चुकाते हैं।

हर साल बढ़ रही संख्या  
आंकड़ों को देखा जाए तो वर्ष 2017-18 की बात करें तो केवल शहर आरटीओ से ही 14 सौ 21 वाहनधारकों ने स्पेशल नंबर के लिए आवेदन किया था। जिनको आरटीओ ने उनके मनपसंद नंबर तो दिया। लेकिन बदले में 1 करोड़ 20 लाख 77 हजार रुपए लिए हैं। इसके बाद वर्ष 2018-19 में और ज्यादा वाहनधारकों ने इसके लिए आवेदन किए । इस बार 1 हजार 4 सौ 84 लोगों ने स्पेशल नंबर की मांग करते हुए आरटीओ के तिजोरी में 1 करोड़ 27 लाख 64 हजार रुपए जमा किए हैं।

अच्छा-खासा राजस्व मिला 
वाहनधारकों द्वारा स्पेशल नंबर की मांग की जाती है। प्रति वर्ष इससे आरटीओ को अच्छा खासा राजस्व मिलता है। गत दो वर्ष में स्पेशल नंबर देकर ढाई करोड़ तक का राजस्व प्राप्त हुआ है।
- अतुल आदे, डिप्टी आरटीओ, शहर आरटीओ नागपुर

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