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 कृषि मंडी में हंगामा- किसानों का शोषण , एक बोरी की तुलाई सात रुपए, व्यापारी वसूल रहे 12 रुपए

 कृषि मंडी में हंगामा- किसानों का शोषण , एक बोरी की तुलाई सात रुपए, व्यापारी वसूल रहे 12 रुपए

डिजिटल डेस्क, छिंदवाड़ा। कृषि उपज मंडी मेें एक बार फिर किसान और व्यापारियों के बीच भुगतान को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है। यहां किसान ने अपनी उपज बेचने के बाद व्यापारी पर भुगतान नहीं करने और प्रति बोरी सात रुपए खर्च की जगह 12 रुपए प्रति बोरी लेने का आरोप लगाया है। इस बात को लेकर दिन भर कृषि उपज मंडी में हंगामे की स्थिति बन गई है। इस बात से नाराज किसान खैरी भुताई निवासी अपील सिंह रघुवंशी ने इसकी शिकायत मंडी सचिव को कर दी है। 

भुगतान को लेकर होता है अक्सर विवाद 

 भुगतान को लेकर अक्सर विवाद की स्थिति बनती है। नियम अनुसार भुगतान समय पर करना होता है, जिसको लेकर अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती है। ऐसी स्थिति में हर बार व्यापारी और किसान खर्च और भुगतान को लेकर आमने-सामने आ जाते हैं।

यह है मामला 

खैरीभुताई निवासी किसान अपील सिंह कृषि उपज मंडी सचिव को शिकायत करते हुए बताया कि उसने 30 जुलाई को 32 क्विंटल 92 किलो गेहूं संजय किशोरी व्यापारी को बेचा है। जबकि वह व्यापारी के पास इसका भुगतान लेने के लिए पहुंचे तो 12 रुपए प्रति बोरी की दर से काटने की बात कही, जबकि नियम अनुसार सात रुपए प्रति बोरी कटना चाहिए। किसान अपील सिंह ने बताया कि व्यापारी उसे भुगतान नहीं कर रहा रहा है।

व्यापारी संघ की शिकायत 

इस मामले में मेसर्स संजय कुमार किशोरी लाल जैन ने सचिव कृषि उपज मंडी को पत्र लिखकर इसकी सूचना दी है। यहां व्यापारी ने बताया कि अपील सिंह रघुवंशी ने उनके पास 32 क्विंटल 90 किलो गेहूं बेचा है, जिसका उन्हें 67 हजार 200 रुपए का भुगतान करना है, जिसमें मंडी में जमा करा दिया है। दिए गए पत्र में बताया गया कि जिस किसान ने बेचा था, उसके स्थान पर कोई और भुगतान लेने आया था, जिसके लिए आईडी मांगा गया था। इस कारण भुगतान नहीं किया गया था। इस मामले में व्यापारी संघ के अध्यक्ष प्रतीक शुक्ला ने भी पत्र लिखा है। 

मंडी सचिव का कहना- लगाएंगे ब्याज 

कृषि उपज मंडी सचिव केएल कुलमी का कहना है कि नियमानुसार किसान का यदि माल बिका है तो इसका भुगतान करना चाहिए यदि भुगतान नहीं हुआ है तो यह गलत है। मैं फिलहाल जबलपुर में हूं, लेकिन इसकी शिकायत कार्यालय में आई है। यदि व्यापारी भुगतान नहीं करते हैं तो मंडी नियम के अनुसार भुगतान पर ब्याज लगाएगी। पांच दिनों तक भुगतान नही होने की दशा में लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई होती है।
 

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