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यूनिवर्सिटी में ‘पुनर्मूल्यांकन’ पर बवाल, 3 वर्ष में वसूला 3.30 कराेड़ शुल्क

यूनिवर्सिटी में ‘पुनर्मूल्यांकन’ पर बवाल, 3 वर्ष में वसूला 3.30 कराेड़ शुल्क

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  यूनिवर्सिटी के कुलगुरु कार्यालय और परीक्षा विभाग में समन्वय की साफ कमी नजर आ रही है। वर्ष 2016 में कुलगुरु डॉ.सिद्धार्थविनायक काणे ने विद्यार्थियों के लिए एक निर्णय लिया था। पुनर्मूल्यांकन में नंबर बढ़ने पर विद्यार्थियों को पुनर्मूल्यांकन शुल्क लौटाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन यूनिवर्सिटी का परीक्षा विभाग इसे पिछले तीन वर्ष से लागू नहीं कर रहा है। हाल ही में एक आरटीआई के जवाब में पुनर्मूल्यांकन कक्ष ने साफ किया है कि शुल्क लौटाने के बारे में कोई भी निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। इधर, कुलगुरु डॉ.सिद्धार्थविनायक काणे कह रहे हैं कि शुल्क लौटाने का नियम अस्तित्व में है। ऐसे में कुलगुरु या यूनिवर्सिटी का आरटीआई में जवाब, इन दाेनों में से कौन सही है, इस पर मतभिन्नता है। 

रिजल्ट से असंतुष्ट विद्यार्थियों की संख्या काफी
नागपुर विश्वविद्यालय ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन परीक्षा सत्र आयोजित करता है। करीब साढ़े तीन लाख विद्यार्थी इसमें शामिल होते हैं। अपने रिजल्ट से संतुष्ट न होने पर विद्यार्थी पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करते हैं। यह संख्या काफी बड़ी है। यूनिवर्सिटी के वित्त व लेखा विभाग के आंकड़ों के अनुसार विश्वविद्यालय ने पुनर्मूल्यांकन के नाम पर वर्ष 2018-19 में कुल 1 करोड़ 66 लाख 92 हजार 737 रुपए वसूल किए। इसके पूर्व वर्ष 2017-18 में 1 करोड़ 15 लाख 53 हजार 657 रुपए वसूले गए। इसके पूर्व वर्ष 2016-17 में पुनर्मूल्यांकन शुल्क के नाम पर विद्यार्थियों से कुल 47 लाख 66 हजार 404 रुपए विश्वविद्यालय के खाते में गए हैं। 

कहा- ऐसा कोई नियम नहीं
वर्ष 2016 में ही कुलगुरु ने शुल्क लौटाने की घोषणा की थी। आरटीआई कार्यकर्ता अभय कोलारकर ने जब आरटीआई में यूनिवर्सिटी से सवाल पूछा कि पिछले तीन वर्षों में विश्वविद्यालय ने पुनर्मूल्यांकन में नंबर बढ़ने वाले कितने विद्यार्थियों काे शुल्क लौटाया तो यूनिवर्सिटी ने जवाब में लिखित उत्तर दिया कि शुल्क लौटाने का कोई नियम अस्तित्व में नहीं है। 

कुलगुरु ने किया खंडन
मामले में यूनिवर्सिटी कुलगुरु डॉ.सिद्धार्थविनायक काणे से संपर्क करने पर उन्होंने सफाई दी कि शुल्क लौटाने का निर्णय अस्तित्व में है। विद्यार्थियों को सिर्फ परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में या फिर कुलगुरु कार्यालय में आवेदन करना है। उन्हें परीक्षा शुल्क लौटाया जाएगा। जहां तक आरटीआई में मिले उत्तर की बात है, संभव है कि उसका अर्थ निकालने में कोई चूक हुई होगी।  शुल्क लौटाने के नियम पर विश्वविद्यालय कायम है। 

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