दैनिक भास्कर हिंदी: सदर फ्लाईओवर बना एक्सीडेंट स्पॉट, डिजाइन में गड़बड़ी ने बढ़ाई समस्या

February 25th, 2020

डिजिटल डेस्क,  नागपुर।  सदर फ्लाईओवर का विषय अब भी अटका हुआ है। इसको लेकर कार्य करने के लिए कोई विभाग आगे नहीं आ रहा है। इसकी समस्या जस की तस बनी हुई है। वीएनआईटी के कहने पर एनएचएआई रिपोर्ट भी बना चुकी है। विभाग रिपोर्ट लेने और कार्य करने आगे नहीं आ रहे हैं। वीएनआईटी के यातयात विभागाध्यक्ष ने एक ही हल बताया है। सभी विभागों के विशेषज्ञ, अधिकारी और शहर के महापौर या अन्य प्रशासन के अधिकारी मिलकर एक समिति बनाएं। यह समिति "अमटा' अर्बन मेट्रोपोलिटन ट्रांजिट अथॉरिटी कहलाएगी। इस समिति में शहर के हर विषय या समस्याओं में चर्चा कर हल निकालने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही हल को क्रियान्वयन किस तरह किया जाएगा और कौन करेगा इसका निर्णय भी लिया जाएगा।

रिपार्ट तैयार हुए 20 दिन से ज्यादा
सदर फ्लाईओवर की डिजाइन में गड़बड़ी के कारण पुल के अंत में केपी ग्राउंड के सामने एक्सीडेंट स्पाॅट बन गया है। आरबीआई चौक से एलआईसी चौक जाने वाले यातायात को लिबर्टी की ओर डायवर्ट किया गया है। इससे नागरिकों को भी परेशानी बनी हुई है। इस समस्या के हल के लिए एनएचआई ने वीएनआईटी के यातायात और इंजीनियरिंग विभाग को विश्लेषण कर सुझाव देने की बात कही थी। वीएनआईटी ने रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद लगभग 20 दिन से भी ज्यादा हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट अभी तक किसी विभाग ने नहीं ली है। सभी विभाग इससे संबंध नहीं होने का कारण बताकर रिपोर्ट लेने से साफ मना कर रहे हैं। एनएचएआई का कहना है कि हमारा कार्य पुल बनाना वह कर दिया इससे ज्यादा हम नहीं कर सकते।

इस तरह करती है कार्य
यह समस्या पिछले 20 दिनों से इसी तरह बनी हुई है। वीएनआईटी विभाग के विश्रुत लांडगे ने इस समस्या के हल के लिए "अमटा' हल दिया है। शहर के सभी विषयों, विभागों, प्रशासनिक अधिकारी और प्रमुख निर्णयकर्ता की समति बनाई जाए। जिसे अर्बन मेट्रोपोलिटन ट्रांजिट अथॉरिटी कहा जाएगा। इस समिति में शहर की किसी भी समस्या के लिए चर्चा कर सभी िवभागों से अपने सुझाव मांगे जाएंगे। सुझावों के बाद समिति अध्यक्ष जैसे महापौर, सासंद या अन्य निर्णयकर्ता उस सुझावों पर क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी दें और कैसे क्रियान्वित करना है, किस विभाग काे सहयोग करना है यह सभी निर्देश दे सकते हैं। इस तरह की समिति विदेशों में कार्यरत है। जिसे सिटी मैनेजमेंट कमेटी भी कहा जाता है।  इसमें रेलवे, यातायात, एनएचएआई, मनपा, पीडब्ल्यूडी, स्टेकहोल्डर्स, बिजली विभाग, कलेक्टोरेट, पुलिस जैसे सभी िवभाग शामिल रहते हैं। इस तरह शहर की किसी भी समस्या का हल निकालना और उसका क्रियान्वयन करना संभव होगा।
 

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