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बहुत कठिन है डगर स्कूल की, नौनिहालों को करनी पड़ रही भारी जद्दोजहद 

बहुत कठिन है डगर स्कूल की, नौनिहालों को करनी पड़ रही भारी जद्दोजहद 

डिजिटल डेस्क, सिरोंचा (गड़चिरोली)। एक ओर सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर आदिवासी छात्रों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ शालाओं के डिजिटलाइजेन की ओर गंभीरता से ध्यान देने का ढिंढोरा पीट रही है। इसके विपरीत गड़चिरोली जिले के अनेक सरकारी स्कूलों में आवश्यक साधन सामग्री नहीं है। यहां तक की अनेक स्कूलों में सुरक्षा दीवार और बिजली  तो, छोड़ो स्कूलों में पहुंचने के लिए मार्ग तक नहीं है, जो सरकार  के सभी दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।

इसका ताजा उदाहरण सिरोंचा तहसील के अंकिसा केंद्र अंतर्गत आनेवाले चेतापल्ली गांव की जिला परिषद स्कूल है। स्कूल पहुंचने के लिए मासूम बच्चों को जद्दोजहद करते देखा जा सकता है। ये बच्चे अपने उज्वल भविष्य की कामना किए कभी घुटने तक पानी भरे मार्ग से तो कभी जंगल के कच्चे रास्तों का सहारा लेकर जैसे-तैसे स्कूल पहुंच रहे हैं। जिले में पिछले सप्ताहभर से जारी भारी वर्षा के कारण क्षेत्र की छोटी-बड़ी नदियां, नाले उफान पर बह रहे हैं। जिसके चलते अनेक इलाकों में बाढ़ सदृश्य स्थिति निर्माण हुई है। मूसलाधार बारिश के कारण अनेक निचले इलाकों में घुटने से ऊपर पानी का बहाव है। इसी तरह सिरोंचा तहसील के अंकिसा केंद्र अंतर्गत आनेवाले चेतापल्ली गांव की जिला परिषद स्कूल के रास्ते में घुटने से ऊपर पानी का बहाव है, जहां नौनिहाल अपनी जान को जोखिम में डालकर इस मार्ग को पार कर रहे हैं।

बता दें कि चेतापल्ली की जिला परिषद स्कूल में चेतापल्ली व परिसर के गांवों के अनेक नौनिहाल प्राथमिक शिक्षा ले रहे हैं। भारी वर्षा के चलते इन दिनों खुद को जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं। प्रतिवर्ष यहां बारिश के मौसम में हालात एक समान रहते हैं। परिसर की ज्यादातर सड़कें कीचड़ में तब्दील हो जाती है तो, अनेक पुलिया पानी में डूब जाते हैं।  आदिवासी बहुल, नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्र के रूप में पहचाने जानेवाले गड़चिरोली जिले के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रति वर्ष करोड़ों रुपयों की राशि भेजी जाती है। जिसके माध्यम से जिले का विकास करना होता है। किंतु स्थानीय प्रशासन के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय के अभाव में जिले का आवश्यकता नुसार विकास होते नहीं दिखाई दे रहा है। क्षेत्र की गंभीर समस्या की ओर स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासन द्वारा इस ओर अनदेखी किए जाने से क्षेत्र के नागरिकों में तीव्र नाराजगी व्याप्त है। फलस्वरूप, स्थानीय प्रशासन यह मासूम बच्चों को होनेवाली परेशानियों की ओर गंभीरता से ध्यान देकर क्षेत्र में पक्की सड़क तैयार कर समस्याओं का निवारण करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग स्थानीय नागरिकों ने की है। 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।