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नागपुर शहर की 123 स्कूलों में नहीं है आग से निपटने के कोई इंतजाम

नागपुर शहर की 123 स्कूलों में नहीं है आग से निपटने के कोई इंतजाम

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शिक्षा के बाजार में पालकों को आकर्षित करने के लिए निजी शैक्षणिक संस्थाओं के दावे तो बहुत बड़े-बड़े हैं। चकाचौंध में भी कोई कमी नहीं है, भारी-भरकम फीस वसूलने में भी पीछे नहीं हैं, लेकिन बच्चों की आग जैसी आकस्मिक सुरक्षा के मापदंड पर कितना खरा उतरते हैं इस बात का बड़ा खुलासा हुआ है। 123 स्कूलों में आग से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। इन स्कूलों द्वारा आलिशान इमारतें, आकर्षक गणवेश, शिक्षकों के ड्रेस कोड की सख्ती पर विशेष ध्यान दिया जाता है। स्कूल में प्रवेश करने से पहले पालकों का साक्षात्कार लिया जाता है। 

अपने ही बच्चों से मिलने के लिए पालकों से पूछताछ की प्रक्रिया पूरी करने के बाद घंटों इंतजार करवाया जाता है। इस प्रक्रिया से गुजरने पर पालकों को भी अहसास होता है कि इस स्कूल प्रबंधन का अनुशासन तो पक्का है, लेकिन हकीकत में यह सब ऊपरी दिखावा करने वाले स्कूल हैं। यहां बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। बड़ी-बड़ी आलिशान इमारतों में दुर्भाग्य से आग लग जाने पर इससे निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। मनपा के अग्निशमन प्रतिबंधक विभाग के निरीक्षण में यह खुलासा हुआ है।

33 का बिजली, पानी बंद
फायर सिक्योरिटी एक्ट अंतर्गत धारा 6 के अनुसार नोटिस जारी करने के बाद भी पूर्तता नहीं करने पर 35 स्कूलों का बिजली, पानी कनेक्शन खंडित करने की कार्रवाई की गई है। नोटिस जारी करने के एक महीने बाद 2 स्कूलों में पूर्तता किए जाने पर बिजली, पानी कनेक्शन पूर्ववत किए गए हैं। अभी भी 33 स्कूलों का बिजली, पानी कनेक्शन खंडित बताया जाता है।

बचाव का एक पहलू यह भी
फायर सिक्योरिटी अधिनियम वर्ष 2008 में लागू हुआ। नियम लागू होने के बाद स्कूलों में फायर सिक्योरिटी सिस्टम लगाना अनिवार्य है। इससे पहले बने इमारतों को यह नियम लागू नहीं होता है। हालांकि तत्कालीन नियम के आधार पर संबंधित स्कूलों को फायर सिक्योरिटी के इंतजाम करना अपेक्षित है। 2008 का अधिनियम लागू नहीं होने का फायदा उठाकर पुराने स्कूल प्रबंधन अपने-आप का बचाव कर रहे हैं।

सुरक्षा के लिहाज से जरूरी
 स्कूल की पुरानी इमारताें पर भले ही फायर िसक्योरिटी अधिनियम लागू नहीं होता, लेकिन विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की है। जानकारों की मानें, तो स्कूल में आग लगने पर सुरक्षा के लिहाज से फायर इक्विपमेंट जरूरी है। उसी के साथ उसे हैंडल करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी की तैनाती भी होनी चाहिए।

54 ने नहीं लिया प्रथम अनापत्ति प्रमाणपत्र
अग्निशमन विभाग के निरीक्षण में फायर सिक्योरिटी इक्विपमेंट नहीं लगाने वाले 123 स्कूलों में 54 स्कूल ऐसे हैं, जिन्होंने अग्निशमन विभाग से प्रथम अनापत्ति प्रमाणपत्र भी नहीं लिया है। 69 स्कूलों ने प्रथम अनापत्ति प्रमाणपत्र तो लिया, लेकिन पूर्तता नहीं की है।

70 स्कूलों में धुआं निकलने की जगह नहीं 
दुर्भाग्यवश स्कूल में आग लगने पर धुआं निकलने के लिए पर्याप्त खिड़कियां होनी चाहिए। निरीक्षण में पाया गया कि 70 स्कूलों का निर्माणकार्य इस तरह किया गया है, जिसमें आग लगने पर धुआं निकलने की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में आग से जलने की बात तो दूर की है, धुआं से ही दम घुंट जाएगा।

स्कूल की मंजूरी प्रक्रिया में शर्त नहीं
स्कूल को मंजूरी देने की प्रक्रिया में फिक्स डिपाॅजिट और संस्था के पास उपलब्ध जमीन के आधार पर अनुमति दी जाती है। इसके बाद स्कूल में आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना अपेक्षित है। स्कूल खोलने के लिए इमारत आवश्यक नहीं रहने से फायर सिक्योरिटी की शर्त नहीं है। चिंतामण वंजारी, जिला शिक्षणाधिकारी (प्राथमिक)
 

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