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शहडोल में भयावह होता कोरोना संक्रमण, 24 घंटे में सात मरीजों की मौत

शहडोल में भयावह होता कोरोना संक्रमण, 24 घंटे में सात मरीजों की मौत

डिजिटल डेस्क शहडोल । संभाग में कोरोना संक्रमण भयावह होता जा रहा है। पिछले 24 घंटे के भीतर शहडोल मेडिकल कॉलेज में कोरोना से सात मरीजों की मौत हुई है। इनमें दो अनूपपुर, एक उमरिया और चार लोग शहडोल जिले के हैं। प्रोटोकॉल के तहत सभी शवों का अंतिम संस्कार मंगलवार को शहडोल स्थित अलग-अलग श्मशान घाटों में किया गया।  मेडिकल कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार शहडोल नगर निवासी 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत तडक़े करीब तीन बजे हुई। उनको 3 अप्रैल को सांस लेने में दिक्कत होने पर भर्ती कराया गया था। बीपी की भी समस्या थी। सोमवार सुबह करीब 7 बजे शहडोल जिले के घोरसा निवासी 55 वर्षीय मरीज की मौत हुई है। वे 28 मार्च से यहां भर्ती थे, लेकिन उनकी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। इससे पहले शहडोल नगर रहने वाले दो अन्य मरीजों की मौत भी सोमवार रात में हुई है। दोनों की उम्र 50 वर्ष से अधिक है। सांस लेने में तकलीफ होने पर यहां भर्ती कराया गया था। हालांकि इसकी जानकारी मेडिकल कॉलेज से नहीं दी गई। श्मशान घाट में दोनों का प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया। 
शवों का प्रोटोकाल के तहत शहडोल में ही हुआ अंतिम संस्कार 
संभाग के तीन अन्य मरीजों की मौत भी मेडिकल कॉलेज में हुई हैं। इनमें से एक उमरिया जिले का जबकि दो मरीज अनूपपुर जिले के हैं। सोमवार रात करीब 9 बजे उमरिया जिले के नौरोजाबाद निवासी 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत हुई। उनको यहां 7 अप्रैल को भर्ती कराया गया था। सांस लेने में दिक्कत थी। इसी तरह वेंकटनगर जिला अनूपपुर निवासी 50 वर्षीय महिला की मौत तडक़े पांच बजे हुई। उनको 10 अप्रैल को यहां भर्ती कराया गया था। शुरू से ही वेंटीलेटर पर थीं। वहीं अनूपपुर के  बदरा निवासी 61 वर्षीय मरीज की मंगलवार सुबह करीब 9 बजे मौत हुई। उनको कोरोना संदिग्ध के रूप में 11 अप्रैल को भर्ती कराया गया था। 12 को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई और 13 अप्रैल को मौत हो गई।
एक दर्जन से अधिक गंभीर 
मेडिकल कॉलेज में अभी भी एक दर्जन से अधिक मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है। उनको वेंटीलेटर पर रखा गया है, वहीं जिन सात मरीजों की 24 घंटे में मौत हुई है, वे सभी भी वेंटीलेटर पर थे। चिकित्सकों के अनुसार सोमवार रात 9 बजे से लेकर मंगलवार सुबह करीब 10 बजे के बीच सभी मौतें हुई हैं। सभी की हालत गंभीर थी। संभाग में कोरोना संक्रमण की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अप्रैल माह के 13 दिनों में मेडिकल कॉलेज में 19 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। इनमें से छह उमरिया और अनूपपुर जिले के हैं। एक छत्तीसगढ़ एक डिंडौरी और 11 शहडोल जिले के हैं। 
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।