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एसटी महामंडल को झटका, नाशिक बस स्टैंड के लिए आरक्षित जमीन हाथ से गई

एसटी महामंडल को झटका, नाशिक बस स्टैंड के लिए आरक्षित जमीन हाथ से गई

डिजिटल डेस्क, मुंबई। नाशिक में एसटी बस स्टैंड के लिए आरक्षित की गई पांच हजार वर्गमीटर जमीन महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल (एमएसआरटीसी) के हाथ से निकल गई है।  25 वर्ष पहले आरक्षित इस जमीन के अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया समय पर पूरा न होने के कारण बांबे हाईकोर्ट ने अब इस जमीन का आरक्षण खत्म करने का निर्देश दिया है। इस लिहाज से अब यह जमीन उसके  मालिक बांबे सेल्सियन सोसायटी नामक ट्रस्ट को वापस मिल जाएगी। ट्रस्ट ने इस संबंध में अधिवक्ता सुनीत मोहोलकर मार्फत हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया था कि ट्रस्ट को शैक्षणिक व दूसरे समाजोपयोगी कार्यों के लिए जमीन की जरुरत है। राज्य सरकार ने ट्रस्ट की इस निजी जमीन को 1993 में एसटी बस स्टैंड के लिए आरक्षित की थी। इसके बाद नाशिक महानगरपालिका ने भी अपने विकास प्रारुप में इस जमीन के आरक्षण का उल्लेख किया। नियमानुसार विकास प्रारुप के लागू होने के दस साल के भीतर जमीन का अधिग्रहण करना जरुरी होता है। लेकिन दस वर्ष की अवधि के अंदर जमीन के अधिग्रहण की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए गए। इसलिए महाराष्ट्र रिजनल टाउन प्लानिंग कानून के तहत जमीन का आरक्षण खत्म हो गया। इसे देखते हुए ट्रस्ट ने साल 2013 में अपनी जमीन वापस करने की मांग को लेकर एसटी महामंडल के नियंत्रक व नाशिक महानगरपालिका को नोटिस जारी किया।

नोटस में ट्रस्ट ने साफ किया कि उसे अपने शैक्षणिक कार्यों के विस्तार के लिए जमीन की तत्काल जरुरत है। इस नोटिस के बाद भी जमीन के अधिग्रहण की दिशा में कोई पहल नहीं हुई। इस बीच ट्रस्ट ने नाशिक महानगरपालिका को भी पत्र लिखा। जिसके बाद ट्रस्ट के प्रतिनिधि को एक बैठक में बुलाया गया। लेकिन बैठक में क्या निर्णय किया गया इसकी सूचना ट्रस्ट को नहीं दी गई। किंतु साल 2017 में जब नाशिक महानगरपालिका ने अपना विकास प्रारुप जारी किया तो फिर ट्रस्ट की जमीन को एसटी बस स्टैंट के लिए आरक्षित दिखाया गया। जो कि नियमानुसार गलत था। 

न्यायमूर्ति अकिल कुरैशी व न्यायमूर्ति एसजे काथावाला की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता व एसटी महामंडल तथा नाशिक महानगरपालिका के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद खंडपीठ ने समय पर जमीन का अधिग्रहण न किए जाने के कारण जमीन का आरक्षण खत्म हो गया है। ऐसे में साल 2017 के विकास प्रारुप में महानगरपालिका द्वारा जमीन को एसटी बस स्टैंड के लिए आरक्षित दिखाना गलत है।  यह बात कहते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार को एक महीने के भीतर राज्य सरकार को जमीन का आरक्षण खत्म होने संबंध में एक महीने में अधिसूचना जाहिर करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से मनपा व एसटी को जारी की गई नोटिस को भी वैध माना है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।