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पीएम के लिए छह घंटे इंतजार, परिजनों ने की मिन्नतें तो डॉक्टर ने भगाया

पीएम के लिए छह घंटे इंतजार, परिजनों ने की मिन्नतें तो डॉक्टर ने भगाया

डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाला एक वक्या रविवार को एक बार फिर सामने आया। एक महिला की मौत के बाद पोस्टमार्टम के लिए परिजनों को लगभग छह घंटे परेशान होना पड़ा। ड्यूटी डॉक्टर से जल्दी पीएम के लिए मिन्नतें कर रहे परिजनों को डॉक्टर ने डांट कर भगा दिया। इसके बाद भी डॉक्टर ने पीएम नहीं किया। ड्यूटी खत्म कर वे घर चले गए। मामला सिविल सर्जन के संज्ञान में आया तब कहीं दोपहर लगभग एक बजे दूसरे डॉक्टर को बुलाकर पीएम कराया गया।
अमरवाड़ा के ग्राम चंदनगांव निवासी सेवकलीबाई ने बताया कि उसकी बेटी राजकन्या पति सुनील वर्मा (27) ने अज्ञात कारणों के चलते 27 मई को जहर का सेवन कर लिया था। इलाज के दौरान रविवार सुबह 6 बजकर 45 मिनट पर उसकी मृत्यु हो गई। बेटी का पीएम होना था। काफी इंतजार के बाद डॉक्टर नहीं आए। डॉक्टर को बुलाने गए तो उन्होंने भगा दिया। दोपहर 12.30 बजे पता चला कि ड्यूटी खत्म कर डॉक्टर साहब घर चले गए है। काफी मिन्नतों के बाद दोपहर लगभग एक बजे दूसरे डॉक्टर ने आकर पीएम किया।
हमारी सुनने वाला कोई नहीं-
मृतका राजकन्या के परिजनों ने बताया कि पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टर के चक्कर काटते रहे। जल्दी पीएम करने के लिए हम डॉक्टर के सामने मिन्नतें करते रहे, लेकिन उनका दिल नहीं पसीजा। डॉक्टर साहब ने हमे अपने कक्ष से बाहर निकाल दिया। अस्पताल में हमारी सुनवाई वाला कोई नहीं था। परेशान होकर परिवार भटकता रहा। आखिरकार लगभग छह घंटे बाद मृतका का पीएम हो सका।
अक्सर बनती है विवाद की स्थिति-
जिला अस्पताल के चिकित्सकों के व्यवहार की वजह से अक्सर विवाद की स्थिति निर्मित होती है। रविवार को सामने आया मामला पहला नहीं है। दूरस्थ अंचलों से आने वाले ग्रामीणों को अक्सर इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ता है। प्रबंधन द्वारा सख्त कार्रवाई न किए जाने से कई चिकित्सक लापरवाह रवैय्या अपनाए हुए है। जिसकी वजह से मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ता है।
क्या कहते है अधिकारी-
- पीएम के लिए परेशान हो रहे लोगों की जानकारी मिलने पर तुरंत व्यवस्था बना दी गई थी। पीएम के पूर्व होने वाली कागजी कार्रवाई में लगभग 11 बज गए थे। दोपहर की शिफ्ट के डॉक्टर ने पीएम कर दिया था।
- डॉ.श्रीमती पी गोगिया, सीएस
 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।