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अब ई-मेल और वाट्सएप पर होगी गड्ढों की शिकायत, संतरा नगरी के जीरो माइल की बदहाली पर हाईकोर्ट नाराज

अब ई-मेल और वाट्सएप पर होगी गड्ढों की शिकायत, संतरा नगरी के जीरो माइल की बदहाली पर हाईकोर्ट नाराज

डिजिटल डेस्क, नागपुर। देश के केंद्र बिंदु के रूप में प्रसिद्ध जीरो माइल की बदहाली पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने गंभीरता दिखाई है। जीरो माइल के सौंदर्यीकरण और संवर्धन पर हाईकोर्ट ने सू-मोटो जनहित याचिका दायर की है। मामले में सोमवार को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के आदेशानुसार मनपा के अधिवक्ता जैमिनी कासट ने जीरो माइल से जुड़े दस्तावेज कोर्ट को दिखाए। उन्होंने बताया कि, जीरो माइल के आस-पास का भूखंड मनपा के विकास प्रारूप में पार्क के लिए आरक्षित है।1907 में स्थापित इस स्मारक को हेरिटेज स्ट्रक्चर का दर्जा प्राप्त है। जीरो माइल के पास काम-काज करने वाले नागपुर मेट्रो को ही मनपा की हेरिटेज कमेटी ने सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी सौंपी है।  इस पर मेट्रो की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.के. मिश्रा और एड. कौस्तुभ देवगड़े ने कोर्ट को बताया कि, मेट्रो ने जीरो माइल के विकास की तैयारी की है। जीरो माइल के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ यहां मेट्रो "हेरिटेज वॉक' तैयार करने जा रही है। मेट्रो इस काम की मंजूरी के लिए 13 नवंबर को हेरिटेज कमेटी के समक्ष प्रेजेंटेशन देगी। अनुमति मिलते ही काम-काज शुरू किया जाएगा। मेट्रो मार्च-2020 तक जीरो माइल के सौंदर्यीकरण का काम पूरा करना चाहती है।

नामांकन की वीडियोग्राफी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखेंगे

उधर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सोमवार को दक्षिण पश्चिम नागपुर निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ एड. सतीश उके द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने निर्वाचन अधिकारी पर आरोप लगाए थे कि, उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के चुनावी नामांकन में कई अनियमितताएं की। उन्हें अवैध तरीके से मदद पहुंचाई गई। याचिकाकर्ता ने याचिका में प्रार्थना की थी कि, फडणवीस के नामांकन से जुड़े दस्तावेज, निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज और अन्य जरूरी डेटा जब्त किया जाए। इस पर निर्वाचन अधिकारी के अधिवक्ता नारायण फडणीस ने कोर्ट को बताया कि, चुनाव आयोग की नियमावली में नामांकन कक्ष की वीडियोग्राफी और सीसीटीवी फुटेज 45 दिनों तक सुरक्षित रखने का प्रवधान है। अगर कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की गई हो, तो 45 दिनों से अधिक दिनों तक डेटा सुरक्षित रखा जाता है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की विनती पर एसडीओ कार्यालय के सभी सीसीटीवी फुटेज का भी डेटा सुरक्षित रखने के आदेश चुनाव आयोग को दिए हैं। इसका उल्लंघन होने पर याचिकाकर्ता को उचित फोरम के समक्ष जाने की छूट दी गई है। कोर्ट ने यह आदेश जारी कर याचिका का निपटारा कर दिया। मामले में चुनाव आयोग की ओर से एड. नीरजा चौबे ने पक्ष रखा।

ई-मेल और वाट्सएप पर होगी गड्ढों की शिकायत

इसके अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सोमवार को सड़क पर गड्ढों की समस्या और उनसे होने वाली दुर्घटनाओं के मुद्दे पर केंद्रित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई में हाईकोर्ट ने साफ किया कि समस्या से जूझ रहे नागरिकों को गड्ढों की शिकायत के लिए आगे आना चाहिए। इसके लिए प्रशासन को शिकायत लेने के प्रबंध करने चाहिए। मुख्य सरकारी वकील सुमंत देवपुजारी ने हाईकोर्ट को जानकारी दी कि गड्ढों की शिकायत के लिए प्रशासन ई-मेल और वाट्सएप सुविधा शुरू कर रहा है। शिकायत मिलते ही संबंधित विभाग को शिकायत भेजी जाएगी, 15 दिन में हल नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी प्रश्न उपस्थित किया कि शिकायत होने से लेकर हल करने तक के समय में होने वाली दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी किसकी होगी? प्राथमिक रूप से यह जिम्मेदारी मनपा अधिकारियों की होनी चाहिए, क्योंकि उनका काम बिना शिकायत हुए भी गड्ढे बुझाने का है, लेकिन इस मामले में हाईकोर्ट में मंगलवार को विस्तृत रूप से सुनवाई होगी। 
 

एसीबी ने बताया- राज्य सरकार ने विनती के बाद भी रद्द नहीं किया विवादित जीआर

उधर विदर्भ के बहुचर्चित सिंचाई घोटाले से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें एसीबी अमरावती ने अपना शपथपत्र प्रस्तुत किया। इसमें हाईकोर्ट को बताया गया है कि सिंचाई घोटाले में आरोपी सरकारी अधिकारी, कर्मचारियों को सरकार के ही एक जीआर से संरक्षण मिल गया है, जिससे एसीबी मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर पा रही है। दरअसल विविध सिंचाई प्रकल्पों में ठेकेदारों ने फर्जी दस्तावेज जोड़े, अधिकारियों ने उसे मंजूर किया और यह घोटाला हुआ। 28 नवंबर 2018 को  जलसंधारण सार्वजनिक निर्माणकार्य विभाग ने एक जीआर जारी कर दिया, जिसमें यह कहा गया कि टेंडर के साथ झूठे दस्तावेज जोड़ने वाले ठेकेदार घोटाले के जिम्मेदार हैं न कि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी। जीआर के कारण प्रारंभिक जांच में दोषी पाए गए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को अनावश्यक सुरक्षा मिल रही है। एसीबी ने इस जीआर का विरोध करते हुए राज्य सरकार से इसे रद्द करने की विनती की, लेकिन अब तक राज्य सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया।  हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को 14 नवंबर तक युक्तिवाद पूरा करने को कहा है। 20 नवंबर से मामले में अंतिम सुनवाई शुरू होगी। जिगाव, लोयरपेढ़ी, रायगड़ और वाघाड़ी सिंचाई प्रकल्प के ठेकेदार पूर्व विधायक संदीप बाजोरिया की बाजोरिया कंस्ट्रक्शन कंपनी को अवैध रूप से वर्क ऑर्डर जारी करने के मामले में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी आरोपी है। जांच के लिए एसीबी ने अजित पवार को भी 57 काॅलम की प्रश्नावली दी है, जिसमें से 52 प्रश्नों के उत्तर पवार ने प्रस्तुत किए हैं। दो बार एसीबी ने पवार से पूछताछ भी की है। एसीबी अमरावती अधीक्षक श्रीकांत ढिवरे ने अपने शपथपत्र में नागपुर खंडपीठ को यह जानकारी दी है।
 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।