निकाला गांधी मार्च : निवासी डॉक्टरों की फीस माफ नहीं होगी, कोरोना काल की सेवा के बदले मिलेगा इंसेंटिव

October 3rd, 2021

डिजिटल डेस्क, नागपुर। मेयो व मेडिकल के निवासी डॉक्टरों की हड़ताल दूसरे दिन शनिवार को भी जारी रही। कोरोनाकाल के दौरान उनकी शिक्षा का नुकसान हुआ है, इसलिए उन्होंने सरकार से फीस माफ करने की मांग रखी। शनिवार को इस संबंध में सेंट्रल मार्ड की सरकार के प्रतिनिधि से बात हुई। इस दौरान स्पष्ट हुआ कि अकादमिक शुल्क माफ नहीं होगा,  लेकिन कोविड काल के दौरान सेवा के बदले इंसेंटिव दिया जाएगा। यह भी मौखिक आश्वासन  है। सेंट्रल मार्ड का कहना है कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। 3 साल का कोर्स, 20 महीने कोरोना ने खराब किए : राज्यभर के निवासी डॉक्टर्स 1 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल में मेयो व मेडिकल के 520 डॉक्टर्स भी हड़ताल में शामिल हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री अमित देशमुख को पत्र भेजा गया था, इस पत्र में निवासी डॉक्टरों ने विविध मांग की है। काेरोनाकाल में निवासी डॉक्टरों ने निरंतर मरीजों का इलाज किया है। दूसरी लहर में ऐसी नौबत आई कि उन्हें अपने परिवार तक को भूला देना पड़ा था। उन्होंने 3 साल के एमडी कोर्स के दौरान 20 महीने कोरोनाकाल में बीता दिए। कोविड के बाद भी नॉन कोविड मरीजों को सेवा देने में लगे हुए हैं। उनकी पढ़ाई का काफी नुकसान हुआ है। इसलिए उन्होंने फीस मांग करने की मांग की थी। उन्हें आश्वासन दिया गया था, लेकिन अमल नहीं किया। इसके साथ ही रिस्क अलाउंस, होस्टल का रिनोवेशन, और कंस्ट्रक्शन की मांग की गई थी। 25 मार्च को फिर से पत्र देकर मांग पूरी नहीं होने पर हड़ताल की चेतावनी दी गई थी। शनिवार को चर्चा के बाद अकादमिक फीस माफ नहीं करने की जानकारी सूत्रों ने दी हैं। कोरोनाकाल में सेवा देने के बदले उन्हें इंसेटिव देने का आश्वासन दिया गया है। ऐसा मेया मार्ड के अध्यक्ष डॉ. नितीन जगताप ने बताया। उन्होंने कहा कि जब तक लिखित में नहीं मिलता तब तक हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल को परिचारिका संगठन व आईएमए महाराष्ट्र का समर्थन मिला है।

गांधी जयंती होने के कारण शनिवार को मेडिकल में जारी हड़ताल को अलग रूप दिया गया। आईसीयू, कैज्युअल्टी व आपात सेवा के सभी डॉक्टरों ने गांधी टोपी पहनकर आंदोलन किया। एक ह्यूमन चेन भी बनाई गई। गांधी मार्च भी निकाला गया, जिसमें एक डॉक्टर महात्मा गांधी की वेशभूषा में शामिल हुआ। आपात सेवा, आईसीयू सेवा व कोविड सेवा जस की तस जारी रही। सामान्य वार्डों की सेवाएं बंद थीं। अस्पताल प्रशासन ने वहां इंटर्न डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई थी। मेयो में भी निवासी डॉक्टरों ने हड़ताल जारी रखी। यहां भी आपात, आईसीयू, कोविड, लेबर रूम में भी सेवा जारी रही अन्य विभागों में इंटर्न डॉक्टर सेवा दे रहे थे। 

मेडिकल में 6 शिशुओं का जन्म

हड़ताल के दौरान मेडिकल में 6 शिशुओं का जन्म हुआ। इनमें 3 बालक व 3 बालिकाएं हैं। मार्ड के अध्यक्ष डॉ. सजल बंसल के अनुसार, निवासी डॉक्टरों ने हड़ताल की है, लेकिन कर्तव्य पालन भी किया है। डॉक्टरों ने गांधीगीरी दिखाते हुए प्रसूति प्रक्रिया पूरी की है। सहयोगी डॉ. नीलम, डॉ. भाग्यश्री, डॉ. मानसी ने मिलकर गर्भवती महिलाओं की प्रसूति कराई। 

 

 

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