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सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सहित सभी राज्यों को प्रवासी बच्चों की संख्या और उनकी स्थिति पर मांगी स्टेटस रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सहित सभी राज्यों को प्रवासी बच्चों की संख्या और उनकी स्थिति पर मांगी स्टेटस रिपोर्ट

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र समेत सभी राज्यों को प्रवासी बच्चों और प्रवासी श्रमिकों के बच्चों की संख्या के साथ-साथ उन्हें मिलने वाले लाभों से संबंधित आंकडों की जानकारी देने के निर्देश दिए है। मुख्य न्यायाधीश शरद बोबडे, न्यायाधीश एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने मंगलवार को चाइल्ड राइट्स ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की, जिसमें मुख्य रुप से कोविड-19 महामारी के दौरान संविधान के अनुच्छेद 14,15,19,21,21ए,39 और 47 के तहत प्रवासी बच्चों और प्रवासी परिवारों के बच्चों के मौलिक अधिकारों को लागू करने की मांग की गई है। चाइल्ड राइट्स ट्रस्ट की ओर से पेश वकील जयना कोठारी ने पीठ से अनुरोध किया कि वह न केवल जवाब के लिए निर्देश दें, बल्कि राज्यों से प्रवासी बच्चों के आंकडे भी मांग करें। साथ ही उन्हें राज्य द्वारा दिए गए लाभों के बारे में भी बताएं। इस मामले में तमिलनाडु राज्य पहले ही अपना जवाब दाखिल कर चुका है। अन्य एक वकील रुखसाना चौधरी द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया है कि पिछले साल घोषित राष्ट्रीय लॉकडाउन के कारण शहरों से लाखों प्रवासियों का पलायन हुआ था। जबकि प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए उपाय किए गए थे, लेकिन प्रवासी बच्चों पर लॉकडाउन के प्रभाव को अधिकारियों द्वारा संबोधित नहीं किया गया था। याचिका में प्रवासी बच्चों के संबंध में चिंता के पांच क्षेत्रों पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें खतरनाक रहने की स्थिति, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य आवश्यकताओं, शिक्षा और सुरक्षा शामिल है। दलीलों में कहा गया कि बच्चों को स्वास्थ्य सेवा और उचित पोषण, शिक्षा तक पहुंच से वंचित रखा गया है। दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने राज्यों को संख्या प्रदान करने के साथ-साथ उन राज्यों में बच्चों पर स्टेटस रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।

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